वो शख्स और कोई नहीं बल्कि गुरदासपुर के एसपी का दोस्त राजेश था जो उस दिन उनके साथ था जब एसपी को आतंकियों ने किडनैप किया था। आतंकी उसे चाकू मारकर उसे मरा समझकर खेतों में फेंककर भाग गए थे।
विज्ञापन
आतंकियों को जिंदा देखने वाला शख्स आया सामने, सुनाई आपबीती
2 of 5
राजेश ने बताया कि एसपी सलविंदर की गाड़ी को वह ही चला रहा था। कोलियां गांव के पास उनकी गाड़ी को आर्मी की वर्दी पहने 4 आतंकियों ने रुकने का ईशारा किया। मैने सोचा कि आर्मी चैकिंग है, इसलिए गाड़ी रोक दी। गाड़ी रुकते ही आतंकी उसकी कनपटी पर बंदूक रख अंदर घुस आए और एसपी के हाथ बांधकर पिछली सीट पर रसोइये मदनलाल के साथ उन्हें पिछली सीट पर बैठा दिया।
विज्ञापन
आतंकियों को जिंदा देखने वाला शख्स आया सामने, सुनाई आपबीती
3 of 5
राजेश के मुताबिक गाड़ी में आतंकी पंजाबी में बात कर रहे थे। कह रहे थे, जिसकी कार छीनी, उसे तो मार दिया। टारगेट तक पहुंचने में और समय बर्बाद नहीं कर सकते। बात करते करते इतने में एसपी और कुक में उन्होंने गाड़ी के बाहर फेंक दिया। उससे पूछा कि यह कौन थे? जब उसने एसपी सलविंदर का परिचय दिया तो आतंकियों को नहीं पता था एसपी कौन होता है?
आतंकियों को जिंदा देखने वाला शख्स आया सामने, सुनाई आपबीती
4 of 5
राजेश ने आगे बताया कि आतंकी के पूछने पर उसने बताया कि एसपी पुलिस का बड़ा अफसर होता है। उनमें से एक ने पाकिस्तान फोन कर बताया कि जो गाड़ी उन्होने छीनी थी, वह बड़े अफसर की थी। इस पर दूसरी तरफ से उन्हें सलविंदर को मारने के निर्देश मिले। आतंकियों ने गाड़ी वापस मुड़वाई और उस जगह पहुंचे जहां सलविंदर सिंह को फेंका गया था।
आतंकियों को जिंदा देखने वाला शख्स आया सामने, सुनाई आपबीती
5 of 5
राजेश ने बताया कि जब ढूंढ़ने पर सलविंदर सिंह न मिले तो आतंकियों ने वापस गाड़ी में बैठकर मुझे अकालगढ़ की ओर मुड़वा लिया। अकालगढ़ में गाड़ी खेतों में रुकवाकर उसके गले पर चाकू मार दिया। आतंकी मुझे मरा समझ एयरफोर्स की बाउंड्री वाल की ओर भाग गए। मैंने गर्दन पर शर्ट का टुकड़ा बांधा और गुरुद्वारे जा रहे आदमी के फोन से जीजा राजकुमार को कॉल की। राजकुमार ने पुलिस को सूचित किया।”