बाबा रामदेव को योगगुरु बने आज 22 साल हो गए हैं। इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं, साइकिल चलाने वाले रामकृष्ण के बाबा रामदेव बनने की कहानी।
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baba ramdev
पूरी दुनिया को योग का पाठ पढ़ाने वाले बाबा रामदेव का असली नाम राम कृष्ण यादव है। करीब 50 साल के बाबा का जन्म हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के अली सैयद्पुर गांव में हुआ। बचपन यहीं पर बीता। बचपन का नाम रामकृष्ण था। खबरें मिली हैं कि बचपन में ही शहीद भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल की तस्वीरें देखकर रामदेव क्रांतिकारी बनने की सोचा करते थे। किसे पता था कि ये एक दिन देश में योग की क्रांति लाएंगे?
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बाबा रामदेव
बाबा रामदेव को शुरू से ही योग में दिलचस्पी थी। योग के प्रति लगाव के कारण एक दिन उन्होंने घर-बार छोड़कर ऋषिकेश जाने की ठान ली। आचार्य प्रद्युम्न व योगाचार्य बल्देवजी से संस्कृत व योग की शिक्षा ली। युवावस्था में संन्यास लिया और पहले वाला रामकृष्ण, स्वामी रामदेव के नये रूप में बदल गया। रामदेव ने कालवा गुरुकुल, जींद जाकर नि:शुल्क योग सिखाया उसके बाद हिमालय में ध्यान और धारणा का अभ्यास करने निकल गए।
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बाबा रामदेव
बाबा रामदेव वहां से सिद्धि प्राप्त कर प्राचीन पुस्तकों व पाण्डुलिपियों का अध्ययन करने हरिद्वार आकर कनखल के कृपालु बाग आश्रम में रहने लगे। यहीं उन्हें अपने जीवन का निर्णायक मोड़ मिला। एक धार्मिक टीवी चैनल ने उन्हें योग के एक प्रोग्राम में फीचर करना शुरू किया। बाबा ने टीवी के माध्यम से जनता तक योग की शक्ति को पहुंचाया। यहीं से बाबा रामदेव ने योग को एक बड़ा ब्रांड बनाने की शुरुआत कर दी।
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बाबा रामदेव
जैसे-जैसे योग से लोगों का जीवन बदलने लगा, वैसे-वैसे उनकी साख बढ़ने लगी। टीवी ने रामदेव को घर-घर पहुंचा दिया और पंतजलि योगपीठ की स्थापना कर योग को मानव-कल्याण की दिशा में कार्यरत किया। उनके आश्रम के बने प्रोडक्ट्स भी घरों में नजर आने लगे। टेलीविजन के रुपहले परदे पर उतर कर रामदेव का योग आम आदमी के बेडरुम तक भी जा पहुंचा है।
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बाबा रामदेव
बाबा रामदेव का प्रणायाम, अनुलोम विलोम और कपाल भाति आसन आज घर घर में लोग जानते हैं। एक टीवी रियल्टी शो में बाबा ने अपने बचपन के बारे में बताया था कि ‘मैं जब 9 वर्ष का था तो बहुत बीमार रहता था। बहुत मोटा भी था। सभी मुझे चिढ़ाते थे। फिर मैंने योग करना शुरू किया और तब से लेकर आज तक 5 बजे उठता आया हूं और परिणाम सबके सामने है।
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बाबा रामदेव
दिव्य योग ट्रस्ट उन दिनों हरियाणा और राजस्थान के शहरों में हर साल करीब पचास योग कैंप लगाता था उन दिनों बाबा को अक्सर हरिद्वार की सड़कों पर स्कूटर चलाते देखा जाता था। साल 2000 से आयुर्वेदिक दवाओं से शुरू होकर फूड प्रोडक्ट्स तक लोगों तक पहुंचाने का सिलसिला शुरू हुआ और बाबा रामदेव ने वॉलेंटियर्स के जरिए कारोबार को फैलाना शुरू किया।
बाबा रामदेव के बिजनेस का ये सिलसिला अब कॉस्मेटिक से लेकर किराना तक पहुंच चुका है। अंदाजा है कि बाबा रामदेव के पतंजलि ब्रांड की ही कीमत आज की तारीख में 5000 करोड़ रुपये तक है। बाबा रामदेव की तरह उनकी आमदनी हमेशा से चर्चा का विषय रही है। बाबा के हर शिविर में कम से कम 50 हजार लोग पहुंचते हैं। बाबा के पास एक हेलीकॉप्टर भी है, जिसे वे अपने एक शिष्य की भेंट बताते हैं।