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साढ़े 3 माह बाद परी को नसीब हुई मां की गोद, आखें छलकीं

Fri, 30 Oct 2015 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, पानीपत(हरियाणा)
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पैदा होने के बाद ही बदले जाने के शक में ठुकरा दी गई 135 दिन की परी को आखिरकार 136वें दिन मां की गोद मिल गई तो नर्सों की आखें छलकीं। देखिए क्यों?
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साढ़े 3 माह बाद परी को नसीब हुई मां की गोद, आखें छलकीं

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पैदा होने के बाद ही बदले जाने के शक में ठुकरा दी गई 135 दिन की परी को लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार 136वें दिन मां की गोद मिल गई। बच्चा बदलने का आरोप लगाने वाली रामनगर की कविता के डीएनए से परी का डीएनए मेल खा गया। वीरवार को प्रशासन और पुलिस ने डीएनए टेस्ट रिपोर्ट सार्वजनिक करने के साथ ही जरूरी कागजी औपचारिकताएं पूरी कर परी को उसकी मां कविता और पिता अमित को सौंप दिया।
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साढ़े 3 माह बाद परी को नसीब हुई मां की गोद, आखें छलकीं

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परिजनों को हर 15वें दिन बच्ची का सिविल अस्पताल में मेडिकल कराने की हिदायत दी गई है। प्रशासन और पुलिस ने वीरवार को सीएमओ कार्यालय में परी और रामनगर निवासी कविता के डीएनए की रिपोर्ट का खुलासा किया। रिपोर्ट सीएमओ डॉ. इंद्रजीत धनखड़ ने पढ़कर सुनाई। पुलिस की तरफ से खुद एसपी राहुल शर्मा और प्रशासन की तरफ से तहसीलदार हरिओम अत्री पहुंचे।

साढ़े 3 माह बाद परी को नसीब हुई मां की गोद, आखें छलकीं

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एसपी ने कहा कि एक अक्तूबर को चंडीगढ़ स्थित लैब में कविता और परी का डीएनए टेस्ट कराया गया। बुधवार रात इसकी रिपोर्ट आ गई थी। परी के डीएनए कविता के साथ मिले हैं। बायोलॉजिकली बच्ची रामनगर निवासी अमित और कविता की ही है। लंबी कागजी कार्यवाही के बाद दोपहर डेढ़ बजे सिविल अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर परी को उसके असल मां कविता व पिता अमित के हवाले कर दिया गया।

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परी के पिता अमित कुमार ने बताया कि उनकी दो बेटियां पहले से हैं। तीसरी बेटी परी को भी वह बराबर का प्यार देंगे। उसे किसी तरह की कमी नहीं आने देंगे। परी के दादा राजबीर ने कहा कि उन्होंने बच्ची को अपनाने से कभी इनकार नहीं किया। वह तो खुद ही ये बात कह रहे थे कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बच्ची पैदा होने की बताई लेकिन दूध पिलाने के लिए हर बार लड़का दिया। इससे उनको शक हुआ और बच्ची का डीएनए टेस्ट कराने की मांग की।

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नैन निवासी कविता के पति प्रदीप ने सच्चाई सामने आने पर खुशी जताते हुए कहा कि वे अपनी जगह सच्चे थे, उन्होंने प्रशासन का पूरा साथ दिया। ऊंचा समाना निवासी कमल ने बताया कि उनकी पत्नी कविता की डिलीवरी एक दिन पहले हो गई थी। उन्होंने भी शुरुआत से सहयोग का रुख रखा। प्रशासन के बुलाने पर बैठक में भी पहुंचे और डीएनए भी कराया।

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परी को गोद में लेते पिता अमित के चेहरे पर रौनक छा गई, जबकि मां कविता का चेहरा अंत तक उतरा रहा। उसने अस्पताल में बच्ची को गोद में भी नहीं लिया। परी को उसने तभी गोद में लिया जब घर जाने के लिए मोटरसाइकिल में बैठने लगी। अमित ने बताया कि उसके पास पहले दो लड़की हैं और अब तीसरी परी मिल गई है। नामकरण पर किए सवाल पर कहा कि शहर और जिले के लोगों ने बच्ची को परी नाम दिया है तो वे भी इसको परी ही बुलाएंगे और रिकार्ड में भी यहीं नाम दर्ज कराएंगे।

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करीब चार माह तक लाड़ प्यार से परी को पाल रही नर्सों की आंखों में वीरवार को उस वक्त आंसू छलक आए जब वह परी को उसके परिवार के सुपुर्द कर रही थीं। स्टाफ नर्स पारुल ने बताया कि वे बच्ची को हर समय नजदीक रखते थे और ड्यूटी पर आते ही सबसे पहले बच्ची को देखते थे। जाते समय भी बच्ची को जरूर देखते थे। वह छुट्टी के दिन भी अस्पताल में आने की कोशिश करती थी। स्टाफ नर्स ऊषा की आंखें कुछ बोलने से पहले भर आईं।

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राहुल शर्मा, एसपी पानीपत ने बताया कि सिविल अस्पताल में 17 जून को जन्मी बच्ची के डीएनए रामनगर निवासी कविता के साथ मैच हुए हैं। बच्ची को कागजी कार्रवाई के बाद उसके असल माता-पिता को सौंप दिया है। उनको बच्चों का हर 15वें दिन मेडिकल परीक्षण कराने की हिदायत दी है। पुलिस आगे भी निगरानी रखेगी।
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