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72 गेंदों पर 300 रन बनाने वाले मोहित के पिता चलाते हैं टेम्पो, पढ़िए हैरान कर देने वाली कहानी

Thu, 09 Feb 2017 05:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
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टी-20 में 300 रन ठोकने वाला मोहित
सिर्फ 72 गेंदों पर 300 रन बनाकर इतिहास रचने वाले मोहित के पिता टेम्पो चलाते है, पढ़िए उन्होने बेटे के इस कारनामें पर क्या कहा...
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मोहित अहलावत
पानीपत के तहसील कैम्प के रहने वाले छोरे मोहित अहलावत की। 21 साल के बल्लेबाज मोहित तिहरा शतक बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए हैं। यह वो कारनामा है, जो हर किसी के लिए मुमकिन नहीं है। दिल्ली के ललिता पार्क में खेली जा रही फ्रैंड्स प्रीमियर लीग के इस मैच में मंगलवार को मोहित के दम पर मावी इलेवन ने 416 रन बनाए। प्रतिद्वंद्वी टीम 200 रन पर सिमट गई।
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मोहित अहलावत
मोहित ने 17 गेंदों में फिफ्टी बनाई। इससे पहले युवराज इंग्लैंड के खिलाफ महज 12 गेंद में अर्धशतक लगा चुके हैं। एक ओवर में सबसे ज्यादा 36 रन युवी के नाम। मोहित 34 रन बना सके। मोहित लगातार 5 छक्के लगा सके, जबकि युवी 6 छक्के लगा चुके हैं। स्कोर बोर्ड के अनुसार, मोहित ने 39 छक्के और 14 चौके के अलावा 6 सिंगल और 3 डबल भी लिए। इस तरह स्कोर 302 रन होना था। स्कोर बोर्ड पर 300 रन ही लिखे हैं।

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मोहित अहलावत - फोटो : Facebook
मोहित का परिवार मूलत: पानीपत के गांव बबैल गांव का रहने वाला है। पिता पवन अहलावत टेम्पो चलाते हैं। मां एक छोटे स्कूल में टीचर हैं। मोहित ने क्रिकेट को तीन साल पहले ही गंभीरता से लेना शुरू किया था। प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि उन्हें बड़ी लीग के लिए चुना जाने लगा। मोहित अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने पिता पवन अहलावत को देते हैं।
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मोहित अहलावत - फोटो : Facebook
मोहित के पिता पवन अहलावत ने बताया कि उन्हें क्रिकेट खेलने का जुनून था। स्कूल स्टेट क्रिकेट प्रतियोगिता में विकेट कीपर व बल्लेबाजी में बेहतरीन प्रदर्शन किया। बाद में घर की आर्थिक स्थित कमजोर होने के कारण दसवीं के बाद पढ़ाई व क्रिकेट छोड़ना पड़ा। परिवार चलाने के लिए टेंपो चलाने लगे। शौकिया तौर पर क्रिकेट जारी रखा। बेटे मोहित को भी मैदान में साथ ले जाते थे। मोहित ने इच्छा जताई कि वह भी विकेटकीपर और बल्लेबाज बनना चाहता है।
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मोहित अहलावत - फोटो : Facebook
पवन बताते हैं कि सैंट मैरी स्कूल में मोहित का दाखिला कराया तो उसका पढ़ाई में कम, क्रिकेट में ज्यादा मन लगता था। शिक्षक ने कह दिया था कि यह पढ़ाई में अच्छा नहीं है, इसे तो क्रिकेटर बना दीजिए। उन्होंने मोहित में अपना अक्स देखा और दसवीं के बाद मोहित को 2012 में बहादुरगढ़ बालाजी क्रिकेट एकेडमी में छोड़ दिया। वहां मोहित को खेलते देख क्रिकेटर गौतम गंभीर के कोच संजय भारद्वाज प्रभावित हुए और वे उसे दिल्ली के लाल बहादुर क्रिकेट अकादमी ले गए।
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टी-20 में 300 रन ठोकने वाला मोहित
पिता ने कहा था क्रिकेट को लो गंभीरता से: मोहित बताते हैं कि उनके पिता ने एक बार कहा था क्रिकेट को गंभीरता से लो। पानीपत छोड़ो और दिल्ली जाओ। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मैं ऐसा नहीं सोचता था। पिता ने मेरी क्रिकेट में रूचि देखते हुए न सिर्फ दबाव बनाया, बल्कि पैसों की व्यवस्था की और मुझे दिल्ली भेजा। यह उसी का परिणाम है।

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टी-20 में 300 रन ठोकने वाला मोहित
पवन ने बताया कि उनके दोस्त बबैल के रविंद्र ने फोन कर बताया कि मोहित ने बड़ी पारी खेली है। उन्होंने मोहित को फोन किया तो वह बोला कि मैं ठीक खेला हूं। पापा मैंने कर दिखाया है। अब रणजी में अच्छा खेलकर टीम इंडिया में जगह बनानी है। मोहित अहलावत दिल्ली की ओर से तीन रणजी खेल चुके हैं। मोहित का रणजी के लिए ऋषभ पंत से चयन हो गया था। तीन मैच भी खेले, लेकिन चल नहीं पाया। सफलता के लिए भाग्य के साथ मेहनत बहुत जरूरी है।
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- फोटो : File Photo
बबैल गांव के राजकीय स्कूल की अतिथि अध्यापिका मां वीना बताती हैं कि मोहित शांत स्वभाव का है। वह महेंद्र सिंह धौनी को आदर्श मानता है। मोहित देसी घी खाता है। दूध भी खूब पीता है। पिता पवन हर दूसरे महीने उन्हें दिल्ली में घी देने जाते हैं। क्रिकेट मैच ज्यादा खेलने के कारण मोहित की परिजनों से मोबाइल फोन पर ही बात होती है। घर वह पांच-छह महीने में आता है। अब हमें उम्मीद है कि मोहित भारतीय क्रिकेट टीम में खेलेगा।


 
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