मेरे बेटे का क्या कसूर है, जो उसे सजा मिल रही है। पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है, मोदी जी बस अब बहुत हो गया कुछ कीजिए।
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कुलभूषण जाधव को सजा-ए-मौत
- फोटो : self
एक बाप ने बेटे को बचाने की गुहार लगाई है। दरअसल,पाकिस्तान कुलभूषण जाधव के मामले में तो अपनी बात पर अड़ा ही है, अब वह नानक सिंह के मामले में भी अड़ गया है। नानक सिंह की रिहाई को लेकर सरकार अब तक 8 पत्र पाकिस्तानी सरकार को लिख चुकी है, लेकिन एक का जवाब नहीं दिया गया। केंद्र सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सतपाल जैन ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में यह जानकारी दी।
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पाकिस्तान के बजरंगी भाईजान ने ढूंढ निकाली नानक सिंह की फैमिली
दरअसल, 33 साल पहले अमृतसर के अजनाला के रहने वाले एक पांच साल के बच्चे नानक सिंह के पशु चराते हुए गलती से पाकिस्तान चले जाने के मामले में नानक की वतन वापसी पर केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में जवाब सौंपा। केंद्र ने कहा कि भारत सरकार के प्रयास के बाद भी पाकिस्तान की ओर से दिलचस्पी न दिखाए जाने के कारण नानक की वतन वापसी नहीं हो पा रही है।
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पाकिस्तान के बजरंगी भाईजान ने ढूंढ निकाली नानक सिंह की फैमिली
फाजिल्का के स्वर्ण सिंह ने याचिका में कहा था कि अजनाला का एक गांव जो पाकिस्तान की सीमा से बिल्कुल सटा है, उसमें रहने वाले गरीब परिवार का पांच वर्षीय बेटा नानक वर्ष 1984 में पशुओं को चराते हुए गलती से पाकिस्तान की सीमा में चला गया था। इस बारे में उसके पिता ने अपने बेटे को वापस लाने के लिए सभी संभव प्रयास किए।
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नानक सिंह की मदद को आगे आईं सुषमा स्वराज
बीएसएफ के सामने मुद्दा उठाया गया तो 1999 में बीएसएफ को पाकिस्तान की ओर से उनकी जेल में रह रहे भारतीय कैदियों की एक सूची सौंपी गई। इस सूची में नानक सिंह का नाम कक्कर सिंह था, जबकि पिता और गांव का नाम साबित करता है कि वह नानक सिंह ही है। 2005 में इस बच्चे के पिता रतन सिंह को बीएसएफ ने पत्र के माध्यम से बताया कि कुछ आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में उनके बेटे को नहीं खोज पा रहे हैं।
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नानक सिंह की मदद को आगे आईं सुषमा स्वराज
स्वर्ण सिंह ने कहा कि अब वह पांच वर्षीय बच्चा 37 वर्ष का व्यक्ति होगा और अब भी बिना किसी जुर्म के पाकिस्तान की जेल है। लंबे समय से केंद्र सरकार सहित राज्य सरकार से गुहार लगाते हुए बेटे को पाकिस्तान से भारत लाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक उसकी वतन वापसी नहीं हो पाई है। जस्टिस एसएस सारों एवं जस्टिस दर्शन सिंह की खंडपीठ ने पिछली सुनवाई पर गृह और विदेश मंत्रालय के सचिव से जवाब तलब किया था।
इस पर केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे भारत सरकार के सीनियर काउंसिल पंकज जैन ने हाईकोर्ट को बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान सरकार को 9 पत्र लिखकर इस बारे में प्रयास किया गया, लेकिन पाकिस्तान की सरकार इस बारे में गंभीर नहीं है। विदेश मंत्रालय ने इस दिशा में गंभीरता से काम किया है और अब भी प्रयास जारी है।