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एक क्लिक करके यहां जानिए, नोटबंदी के क्या फायदे हुए और क्या नुकसान?

Thu, 09 Nov 2017 09:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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noteban, new note, demonetisation
नोटबंदी को एक साल हो गया, लेकिन न तो अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सकी और न ही भ्रष्टाचार पर लगाम लगी। अब यहां क्लिक करके जानिए, इसके फायदे और नुकसान।
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noteban
अनिल चड्ढा, चार्टर्ड एकाउंटेंट, चंडीगढ़ से बातचीत से लगता है कि एक साल बाद भी रियल इस्टेट, सर्विस सेक्टर, व्यापारी और उद्यमी नोटबंदी से जूझ रहे हैं। इसके होने से देश की अर्थव्यवस्था में कोई चामत्कारिक परिणाम नहीं दिखाई दिया। नोटबंदी प्लास्टिक मनी तो लाई पर एक सीमित से वर्ग में। रियल इस्टेट सेक्टर हो या फिर रिटेल सेक्टर और सर्विस सेक्टर सभी इसके प्रभावों से अब तक जूझ रहे हैं। एक वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की।
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नोटबैन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
एकदम से बाजार में चलने वाले पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटों पर रोक लग गई। इसका सीधा असर यह हुआ कि अर्थव्यवस्था में भूचाल आया, हड़कंप मचा और एक नया बाजार तैयार हो गया। यह तो त्वरित असर था। कालाधन हो या सफेद धन.. एक अरसे से अपने नोट को सिर्फ खरीददारी का माध्यम मानने वाले लोगों को एकदम से अपने इसी नोट का ख्याल आया।

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Note ban
नोटबंदी का फैसला एकदम ठीक माने तो उसके लिए सरकार को आगामी स्टेप के लिए पहले से इंतजाम करना चाहिए था? लेकिन हुआ क्या एक ओर आम जनता बैंकों में नोट जमा करवाने के लिए लाइन में लगी थी और दूसरी ओर कुछ कारपोरेट्स अपने नोट एक्सचेंज करवाने में लग गए। ऐसी खबरें भी सामने आईं। कोई भी स्टेप लेने के पहले यदि पहले से हम उसके विपरीत और दुष्प्रभावों को समझ लेते तो ज्यादा बेहतर होता।
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कैश
नोटबंदी का सबसे ज्यादा प्रभाव हुआ रियल इस्टेट सेक्टर पर। नोटबंदी के पहले इस सेक्टर में कैश का फ्लो ज्यादा था। उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि मंदी के असर से यह सेक्टर पहले से ही जूझ रहा था। नतीजा यह हुआ कि नोटबंदी के बाद ट्राईसिटी के कई प्रोजेक्ट ठप पड़ गए। ऐसे सेक्टरों के लिए एक साल में रिकवरी संभव नहीं। औसतन पचास फीसदी प्रोजेक्ट पर नोटबंदी की गाज गिरी। यह तो था नोटबंदी से बिल्डरों पर हुआ असर।
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नोटबंदी, बैंक, करेंसी एक्सचेंज - फोटो : self
दूसरा प्रभाव, मार्केट से ग्राहक गायब हो गए। वो भी ऐसे कि अब तक रियल इस्टेट सेक्टर इसको तलाश रहा है। नोटबंदी आम आदमी से एकदम जुड़ी थी। छोटे दुकानदार डिजिटल मनी के अभ्यस्त नहीं थे और वह नए नोट लेने के लिए तैयार नहीं थे। यह ज्यादातर लोगों की परेशानी थी। इससे रिटेल मार्केट एकदम नीचे आ गई। वास्तव में रेवेन्यू का नुकसान सीधा सरकार को ही हो रहा था। वह भी देश के लिए अरबों का नुकसान था।
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नोटबंदी का असर
नोटबंदी से कैश फ्लो एकदम खत्म हो गया। ट्राईसिटी में ज्यादातर जनसंख्या कैश पर ही व्यापार करती थी और अभी भी कई सेक्टर कैश पर ही हैं। उसके ऊपर नोटबंदी के समय प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। नोटबंदी के बाद से व्यापार का ग्राफ नीचे ही चला गया। इसका एक बड़ा प्रभाव हुआ जिसमें बैकों के पास अच्छा रेवेन्यू इकट्ठा हो गया। नोटबंदी के बाद एनपीए पर भी असर आया पर अब फिर से एनपीए में असर आ गया है। लोन की दरें निवेश पर कम हो गईं।

 

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नोटबंदी का सदमा
अब नोटबंदी के असर को यदि शेयर मार्केट पर देखें तो उस समय तो शेयर बाजार नीचे गय पर उसके बाद शेयर मार्केट बेहतर हो गया। शेयर बाजार में तेजी आना तो ठीक था पर मार्केट में महंगाई घर कर गई। शेयर मार्केट की तेजी इस वजह से हुई कि शेयर मार्केट के प्लेयर्स ने पहले ही अंदाजा लगा लिया था कि इस नोटबंदी से बड़े कंपनियों का ग्राफ तेजी से ऊपर जाएगा। इसी वजह से शेयर मार्केट में पैसा ज्यादा लगा और नतीजा सामने है।
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नोट की सच्चाई
नोटबंदी का प्रभाव सर्विस सेक्टर पर हुआ। आप देखें तो छोटे व्यापारियों ने नोटबंदी के बाद कर्मचारियों की संख्या में कटौती की है। इसका प्रभाव रोजगार पर सीधा रहा। करीब पच्चीस से तीस फीसदी नौकरी खत्म हुईं। नोटबंदी ठीक है पर यदि इसके लिए सिस्टम पहले से तैयार होता तो यह ज्यादा प्रभावी होती।

 
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