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चंडीगढ़ : आठ एकड़ भूमि पर जमा हुआ एक लाख टन कचरा, इस पहाड़ को खत्म करने में लगेंगे आठ करोड़ रुपये

Sun, 28 Mar 2021 03:28 PM IST
ajay kumar नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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डंपिंग ग्राउंड में लगा कूड़े का विशाल ढेर। - फोटो : अमर उजाला
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डंपिंग ग्राउंड पर 10 मीटर ऊंचा कचरे का नया पहाड़ तैयार हो गया है। हाल ही में स्मार्ट सिटी के शोध में आठ एकड़ भूमि पर लगभग एक लाख टन कचरा इकट्ठा होने की बात सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, इस कचरे में नमी है, इसलिए इसे निस्तारित करने में लगभग आठ करोड़ से ज्यादा रुपये लगेंगे। हालांकि, निगम इस कचरे के निस्तारण के लिए जेपी समूह से पैसा लेने की बात कर रहा है। इसके लिए अदालत में अपील भी की गई है। 

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डंपिंग ग्राउंड पर कचरे का पहाड़ खत्म नहीं हो पाया कि कचरे का नया पहाड़ खड़ा हो गया है। वहीं, कचरा निस्तारण प्लांट में शहर का पूरा कचरा निस्तारित न होने से ज्यादातर कचरा डंपिंग ग्राउंड में फेंका जा रहा है और जिसे धकेलते हुए डड्डूमाजरा कॉलोनी की तरफ बढ़ा दिया गया है ताकि कचरे का पहाड़ ऊंचा न दिखे। 

निगम आयुक्त केके यादव ने बताया कि पांच लाख टन कचरे को निस्तारित करने के लिए अभी स्मार्ट सिटी प्रति टन 574 रुपये और 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से दे रही है। इस हिसाब से एक लाख टन कचरे के निस्तारण के लिए लगभग 7 करोड़ रुपये लगेंगे, लेकिन यह नमी वाला कचरा है। ऐसे में इसके दाम ज्यादा होंगे। अनुमान के मुताबिक, करीब आठ करोड़ का खर्च आएगा।

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जून 2020 में निगम ने प्लांट को लिया था कब्जे में 

एनजीटी के आदेश को आधार बनाकर नगर निगम ने जून 2020 में जेपी प्लांट को अपने कब्जे में ले लिया था। उसके बाद निगम ने दावा किया था कि कचरे का निस्तारण कर देंगे, मगर मशीनों की क्षमता कम होने के कारण निगम 500 टन में से मात्र 40 प्रतिशत कचरा ही निस्तारित कर सका। उसके बाद बचे कचरे को डंपिंग ग्राउंड पर फेंकना शुरू कर दिया। दबाव बढ़ने के साथ निगम ने प्लांट को निजी हाथों में देने का फैसला लिया। हालांकि, प्लांट के संचालन के लिए 13 कंपनियों ने आवेदन किया है। इन सभी कंपनियों की निगम ने प्रस्तुति भी देख ली है। अब सदन में अंतिम फैसला होगा। 

सैनेटरी लैंडफिल पर ही कचरा गिरा दिया 
कचरे का पहाड़ बड़ा न दिखे, इसलिए निगम ने कचरे को कॉलोनी की तरफ धकेलना शुरू कर दिया है। यहां निगम ने करोड़ों रुपये से सैनेटरी लैंडफिल बनाई थी। इसके ऊपर भी कचरा डाला जा रहा है। हाल यह है कि कचरा अब डंपिंग ग्राउंड की दीवार से बाहर आकर गिरता जा रहा है। बारिश होने पर लीचैट सीधा लोगों के घरों तक पहुंच जाएगा। 

कचरे का पहाड़ एक इंच कम नहीं हुआ 
साल 2019 में सपना दिखाया गया था कि एक साल में सारा कचरा निस्तारित कर दिया जाएगा। उसके बाद खाली भूमि पर खेल का मैदान बनाया जाएगा। दो साल होने को हैं लेकिन कचरे का पहाड़ एक इंच भी कम नहीं हुआ है।  - दयाल कृष्ण, स्थानीय निवासी

मशीनें पुरानी हैं, इसलिए आ रही है समस्या
गीला कचरा तो पूरा निस्तारित हो रहा है। सूखा कचरा निस्तारित करने वाली मशीन कमजोर है, इसलिए शेष कचरे को डंपिंग ग्राउंड में भेजा जा रहा है। अभी स्मार्ट सिटी की टीम से नए कचरे का आकलन भी कराया है। इस कचरे के निस्तारण का भुगतान जेपी समूह से ही करवाएंगे। - केके यादव, निगम आयुक्त
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