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जानिए क्या है अंगदान... कौन-कौन से अंग कर सकते हैं दान और किन्हें नहीं करना चाहिए ये काम

Thu, 13 Aug 2020 01:25 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर
अंगदान दिवस के मौके पर हम आपको बता रहे हैं अंगदान के बारे में और इससे जुड़ी कुछ विशेष जानकारियां, जो बड़े काम आएंगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
क्या है अंगदान
अंगदान वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा जैविक ऊतकों या अंगों को एक मृत या जीवित व्यक्ति से निकालकर किसी दूसरे के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को हार्वेस्टिंग के रूप में जाना जाता है। इसे ही अंगदान कहा जाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
इन अंगों को कर सकते हैं दान
डॉक्टरों के मुताबिक, मौत के बाद अंगदान करके एक व्यक्ति कम से कम आठ लोगों की जान बचा सकता है। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद सभी अंग डोनेट किए जा सकते हैं। इसके लिए परिजनों की स्वीकृति लेना अनिवार्य है। ब्रेन डेड मरीज की किडनी, लीवर, फेफड़ा, पैनक्रियाज, छोटी आंत, वॉयस बॉक्स, हाथ, यूट्रस, ओवरी, फेस, आंखें, मिडिल ईयर बोन, स्किन, बोन, कार्टिलेज, तंतु, धमनी व शिराएं, कोर्निया, हार्ट वाल्व, नर्व्स, अंगुलियां और अंगुठे दान किए जा सकते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
कौन कर सकता है अंगदान
कैंसर, डायबिटीज जैसी घातक बीमारी नहीं है, वह व्यक्ति अंगदान कर सकता है। कैंसर और एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति, सेप्सिस या इन्ट्रावेनस दवाओं का इस्तेमाल करने वाले अंगदान नहीं कर सकते।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
जीवित रहते हुए दान किए जाने वाले अंग  
यकृत-  यकृत (लीवर) में पुन: निर्माण की क्षमता होती है। यदि यकृत का एक हिस्सा दान कर दिया जाए तो वह फिर से वृद्धि या उसी स्थिति को प्राप्त कर लेता है।  
गुर्दा- मनुष्य एक गुर्दे (किडनी) से भी जीवित रह सकता है, इसलिए दूसरे गुर्दे को दान किया जा सकता है।  
फेफड़े- फेफड़े के एक भाग को दान किया जा सकता है। यह यकृत के विपरीत हैं अर्थात फेफड़ों में पुन: निर्माण की क्षमता नहीं होती है।
आंत-  दुर्लभ मामलों में दाताओं के द्वारा आंत का एक हिस्सा दान किया जा सकता है। 
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सांकेतिक तस्वीर
अंगदान में बाधाएं
- जागरूकता की कमी।
- सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौत के मामले में नियम के अनुसार केवल उन्हीं के अंग निकाले जा सकते हैं, जिनकी मृत्यु अस्पताल में होती है। इसके परिणामस्वरूप मौके पर मरने वाले व्यक्ति के अंगों को दान करने में परिजन असमर्थ हैं।
 - एक अन्य प्रमुख कारण यह है कि बहुत से लोग अपने जीवनकाल में अपने अंगों को दान करने की इच्छा (निधन होने पर अंगों को दान करने की एक पंजीकृत इच्छा) ही नहीं करते हैं।
- धार्मिक मान्यताओं के प्रति विश्वास और गलत धारणाएं भी व्यक्तियों को अंगदान करने से बाधित करती हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
अंगदान एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से एक गंभीर मरीज को पुनर्जीवन मिल सकता है। लेकिन अभी लोगों में जागरूकता का अभाव है। इसके लिए व्यापक स्तर पर सबको मिलकर प्रयास करना होगा।
- डॉ आशीष शर्मा, रीनल ट्रांसप्लांट हेड, पीजीआई
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