786 नंबरों के नोट जुटाने में 27 साल मेहनत की, वो एक फैसले से रद्दी हो गए। देखिए किसी सदमें से कम नहीं है इनके लिए ये फैसला...
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786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
786 को अल्लाह का पाक और लकी अंक माना गया है। बहुत से शौकीन ऐसे हैं, जो इस अंक की सीरीज वाले नोट वर्षों से एकत्र करने में लगे हैं। पांच सौ व एक हजार रुपये के पुराने नोट बंद होने के फैसले से 786 नंबर वाले नोट सहेजकर रखने वाले शौकीनों को झटका लगा है।
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786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
कई वर्षों के अथक प्रयास से एकत्र किए गए यह नोट अब शौकीनों को भरे मन से बदलवाने पड़ रहे हैं। मुक्तसर के बागवाली गली निवासी तरसेम गोयल ने 786 नंबर वाले लगभग 25 हजार रुपये के नोट एकत्र कर रखे है। इनमें करीब 20 हजार रुपये के पांच सौ व हजार के नोट हैं।
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786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
ऐसे में अब वह भरे मन से वर्षों के प्रयास से एकत्र इन नोटों को बदलवाने की सोच रहे हैं। तरसेम गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नोटबंदी का फैसला बेशक सराहनीय है, मगर इससे 786 नंबर वाले नोट एकत्र करने वाले शौकीनों के शौक को शोक में बदल दिया है।
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786 नंबरों के नोट जुटाने का शौक
गोयल ने कहा कि अगर वह यह नोट नहीं बदलवाते हैं तो उन्हें करीब 20 हजार का नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वह 786 को लकी अंक मानते हैं और इनमें से कई नोट तो उन्होंने ज्यादा दाम चुकाकर अन्य किसी से लिए थे।
तरसेम गोयल ने कहा कि अब वह पुराने नोटों को बदलवा कर आगे से नए नोटों में 786 अंकों वाले नोट एकत्र कर अपने शौक को जारी रखेंगे। इसी तरह जलालाबाद रोड स्थित आदराम स्ट्रीट निवासी सोनू कुमार ने बताया कि उसके पास भी एक हजार रुपये का 786 अंक वाला एक नोट है। वह इसे हरगिज नहीं बदलवाएंगे। सोनू का कहना है कि वह इस नोट को यादगार के तौर पर संभालकर रखेंगे।