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नेहरू ही नहीं भगत सिंह के परिवार की भी हुई जासूसी

Thu, 16 Apr 2015 09:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,चंडीगढ़
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रिश्तेदारों की जासूसी के मुद्दे पर विवाद के बीच शहीद भगत सिंह के परिवार से सालों तक जासूसी होने की बात सामने आई है। तस्वीरों में पूरा मामला।
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पंजाब में ये मामला शहीद भगत सिंह के भतीजे किरणजीत सिंह और भतीजे अभय सिंह संधु ने उठाया। उन्होंने कहा कि आजादी से 2 दशक बाद तक शहीद भगत सिंह के परिवार की भी जासूसी होती रही थी।
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किरणजीत सिंह ने कहा कि कई केंद्रीय एजैंसियां आजादी के बाद लगातार उनके परिवार पर नजर रखती रहीं और 1970 के बाद यह जासूसी बंद हुई। किरणजीत सिंह ने मांग की कि सरकार नेताजी के साथ संबंधित फाइलों को सार्वजनिक करे ताकि देश को सही जानकारी मिल सके।

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किरणजीत सिंह ने कहा कि जिस सियासी मंदभावना का शिकार नेताजी सुभाष चंद्र बोस हुए हैं, उसका शिकार शहीद भगत सिंह को भी होना पड़ा है। अगर गांधी चाहते तो शहीद भगत सिंह की फांसी रुक सकती थी क्योकि अंग्रेज सरकार ने इस बारे गांधी जी के साथ बात की थी पर गांधी जी ने कभी भी शहीद भगत सिंह का पक्ष नहीं लिया।
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भगत सिंह के भतीजे अभय सिंह संधु ने बताया, हमारे परिवार पर कई सालों तक नजर रखी गई। फोन पर होने वाली हमारी बातचीत भी सालों तक निगरानी के दायरे में रही।' उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के समय से ही उनके परिवार पर पैनी नजर रखी गई। उन्होंने दावा किया, देश की आजादी के बाद भी हम खुफिया एजेंसियों की नजर में थे।
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संधु ने यह मांग भी की कि भगत सिंह के चाचा और स्वतंत्रता सेनानी सरदार अजित सिंह से जुडी फाइलें भी सार्वजनिक की जाए। उन्होंने कहा, ''हम वह सारी चीज जानना चाहते हैं जो ब्रिटिश सरकार ने सरदार अजित सिंह और शहीद भगत सिंह के बारे में लिखी थी। सारे रेकॉर्ड्स को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। सरकार क्यों छुपा रही है? हमें उम्मीद है कि मौजूदा केंद्र सरकार जल्द ही इस बाबत कदम उठाएगी।''
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संधु भगत सिंह के छोटे भाई सरदार कुलबीर सिंह के बेटे हैं जिनका जन्म 1914 में हुआ था और वह फिरोजपुर से जनसंघ के विधायक थे। संधु ने कहा, ''मेरे पिता दिवंगत सरदार कुलबीर सिंह ने दोनों से जुडी वे फाइलें और रेकॉर्ड प्राप्त करने की कोशिश की थी जिन्हें दिल्ली के राष्ट्रीय अभिलेखागार में रखा गया है।''
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बकौल संधु उन्हें बताया गया कि फाइलें 'गुप्त' हैं और 20-30 सालों तक के लिये अहस्तांतरीण हैं। उन्होंने कहा, ''मेरे पिता का निधन 1983 में हुआ था, लेकिन उसके बाद भी जब हमने मांग की तो हमें वही जवाब मिला।' संधु ने कहा कि कुलबीर सिंह की मौत के बाद भी उनके परिवार ने दस्तावेज हासिल करने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
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