कल्चर प्रोग्राम में प्रस्तुति देने वाली युवतियों ने नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी को नाचने के लिए मजबूर कर दिया। देखिए तस्वीरें।
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देखिए, युवतियों के साथ कैसे नाचे नोबेल विजेता?
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कैलाश सत्यार्थी चंडीगढ़ के जीएमसीएच 32 में आयोजित टेक्नो फेस्ट 2015 में पहुंचे थे। इस दौरान कैलाश को नाचने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने मंच पर पहुंचकर कहा कि पंजाब की धरती में बहुत ताकत है। यह पहली बार होगा कि किसी नाबेल पुरस्कार विजेता को उंगुलियों पर नचाया गया होगा।
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कैलाश ने बताया कि उनका चंडीगढ़ से गहरा नाता है। उनकी भतीजी डॉ. मनीषा तिवारी पंजाब यूनिवर्सिटी के स्टेटिस्टिक विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। कैलाश ने कहा कि करोड़ों भक्तों के सामने धर्मगुरु कभी बाल मजदूरी के खिलाफ आवाज नहीं उठाते। देश के नेता कभी बच्चों के मुद्दों को राजनीति में प्राथमिकता नहीं देते। जब तक उनकी सांस रहेगी, वह समाज की इस मानसिकता के खिलाफ लड़ते रहेंगे।
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दुनिया भर में पहली बार बाल मजदूरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ के संयोजक कैलाश ने कहा कि सरकार को बाल मजदूरी रोकने के लिए गहराई से मंथन करना चाहिए। हरियाणा और पंजाब का जिक्र करते हुए सत्यार्थी ने कहा कि इन राज्यों में भी बड़े स्तर पर बाल मजदूरी हो रही है।
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कैलाश ने कहा कि शांति का नोबेल पुरस्कार देश के सवा सौ करोड़ लोगों को समर्पित कर दिया है। उनके पास न पहले कोई मेडल था और न ही अब है। कैलाश ने कहा कि कि नोबेल पुरस्कार की घोषणा के बाद उन्होंने राष्ट्रपति से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने कहा कि देश के पास एक भी नोबेल नहीं है। रविंद्रनाथ टैगोर को मिला एकमात्र नोबेल मेडल चोरी हो गया। कैलाश ने उसी समय उस मेडल को देश को समर्पित करने का फैसला कर लिया था।
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जीएमसीएच 32 में आयोजित टेक्नो फेस्ट 2015 में पैरामेडिकल स्टूडेंट और डाक्टर को संबोधित करते हुए कैलाश ने कहा कि बड़े होकर वे दुकानदारी नहीं करेंगे। उनका मकसद मानवता की सेवा करना होगा।
कैलाश ने कहा कि करोड़ों भक्तों के सामने धर्मगुरु कभी बाल मजदूरी के खिलाफ आवाज नहीं उठाते। देश के नेता कभी बच्चों के मुद्दों को राजनीति में प्राथमिकता नहीं देते। जब तक उनकी सांस रहेगी, वह समाज की इस मानसिकता के खिलाफ लड़ते रहेंगे।