नवजात की आंखें खुलने से पहले ही बंद हो गईं। सेक्टर-16 अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम तो किया, लेकिन मुख्य जवाब वो भी नहीं दे पाए।
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नवजात की ऐसी मौत, पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टर भी हैरान
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गौरतलब है कि चंडीगढ़ के नामी चैतन्य अस्पताल में मृत बच्ची को जिंदा बताकर रुपए ऐंठने के आरोप से जुड़े मामले में पुलिस को कार्रवाई के लिए और इंतजार करना पड़ेगा। बच्ची का पोस्टमार्टम करने वाली डाक्टरों की टीम बच्ची की मौत का समय नहीं बता पाए।
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इस केस में बच्ची की मौत का समय अहम सबूत है। इसलिए पुलिस ने यह जानकारी मांगी थी। डॉक्टरों ने बच्ची के शव से ब्रेन, हार्ट और लंग्स के सैंपल केमिकल एग्जामिनेशन के लिए निकाले हैं। इन्हें जांच के लिए जीएमसीएच-32 भेजा जाएगा। रविवार को छुट्टी की वजह से ये सैंपल वहां नहीं भेजे जा सके। डॉक्टरों के अनुसार मौत का सही समय और कारण जानने के लिए ये सैंपल भेजे गए हैं।
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पोस्टमार्टम के बाद बच्ची का शव परिजनों को सौंप दिया गया। चैतन्य हास्पिटल के कंप्यूटर की हार्ड डिस्क भी पुलिस ने कब्जे में ले ली थी और इसे जांच के लिए सीएफएसएल की लैब में भेजा जाएगा, ताकि उसके सभी रिकार्ड प्राप्त किए जा सके। बलजीत सिंह, एसएचओ, सेक्टर 34 ने बताया कि नवजात के सैंपल और कंप्यूटर की हार्ड डिस्क को जांच के लिए भेज दिया गया है। कार्रवाई के लिए रिपोर्ट का इंतजार है।
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पोस्टमार्टम के बाद जब शव सौंपा गया तो परिजनों ने ने नवजात को बदलने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि जब उन्होंने बच्चे को देखा था तो उसका रंग काला पड़ गया था, लेकिन हास्पिटल में जब उसे लाया गया तो उसका चेहरा लाल था। उन्हें बच्चे को बदलने का भी शक था। पुलिस ने उनके शक को दूर करने के लिए उसकी डीएनए सैंपलिंग करने का आश्वासन दिया। नवजात का ब्लड सैंपल ले लिया गया है। बच्चे के पिता अमित गोयल का ब्लड सैंपल सोमवार को लिया जाएगा।
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शनिवार को चैतन्य हास्पिटल के डाक्टरों पर मृत नवजात को आईसीयू में रखकर रुपये ऐंठने का आरोप लगाया गया था। नवजात के पिता अमित गोयल का आरोप था कि उनके बच्चे की मौत शुक्रवार रात को ही हो गई थी, लेकिन डाक्टरों की ओर से इसे छुपा जा रहा था। इस बात की जानकारी उन्हें हॉस्पीटल के एक अटेंडेंट से तब मिली जब वह बच्चे की जांच रिपोर्ट लेने पहुंचे।
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अटेंडेंट ने बताया कि बच्चे की तो मौत हो चुकी है। उन्होंने यह बात जब अस्पताल के डॉक्टरों से पूछी तो उन्होंने कहा कि बच्चा जिंदा है। इस पर परिजनों के अनुरोध पर पीजीआई के डॉक्टर को बुलाया गया, जिन्होंने बच्चे को मृत बताया। इसके बाद अस्पताल में हंगामा हुआ। इस पर पुलिस पूछताछ के लिए हास्पिटल के चार डाक्टर डॉ. अनिल नारंग, डॉ. नीरज, डॉ. बबिता व डॉ. पूनम को थाने लाई थी, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया था।
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हास्पिटल प्रशासन की ओर से बताया गया था कि नवजात प्रीमिच्योर था। उसकी सांस नहीं चल रही थी। सिर्फ हार्ट बीट रिस्पांस कर रही थी। उसे नीयोनेटल के आईसीयू में रखा गया था। हंगामे के बाद पुलिस ने एक डाक्टर के पैनल से बच्चे का पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया था, ताकि मौत का सही समय का पता लगाया जा सके। मगर यह पैनल पोस्टमार्टम से यह पता नहीं लगा सका और सैंपल आगे जांच के लिए भेज दिए गए।