नवजोत सिंह सिद्धू
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वह अच्छी तरह से एक प्रहार की ताकत से अवगत थे। इतना ही नहीं उन्होंने अपने से दोगुने उम्र के व्यक्ति पर प्रहार किया था। पीठ ने अपने आदेश में कहा है, मुक्केबाज, पहलवान, क्रिकेटर या फिट व्यक्ति का हाथ भी हथियार हो सकता है। उत्पन्न परिस्थितियों में भले ही आपा खो गया हो लेकिन फिर भी गुस्से का नतीजा भुगतना होगा। शीर्ष अदालत ने अपराध की गंभीरता और सजा के बीच एक उचित अनुपात बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि एक असमान रूप से हल्की सजा अपराध के शिकार को अपमानित और निराश करती है।