नरेंद्र चंचल
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नरेंद्र को भेंट गाने से कोई लगाव नहीं था, वह बस मंदिर में शरारत करते रहते। मंदिर के पुजारी ने नरेंद्र की मां से कहा कि देखो, आपका बेटा कितना चंचल है। बेटे को भेंट गाने की प्रेरणा देने के लिए कैलाशवती उन्हें रामायण की कहानियां सुनती थी, जिसका नरेंद्र के बालमन में गहरा प्रभाव पड़ा। कुछ साल बाद जब नरेंद्र मंदिर में भेंट गाने लगे तो पुजारी ने उन्हें चंचल का नाम दिया था।