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बेटे की शहादत पर मां ने जो कहा, वो सबको पढ़ना चाहिए, गांव में पसरा मातम, किसी भी घर में नहीं जला चूल्हा

Fri, 22 Jan 2021 10:24 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबाला (हरियाणा)
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- फोटो : अमर उजाला
तिरंगे में लिपटा शहीद हवलदार निर्मल सिंह का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव की सीमा में पहुंचा तो हर आंख नम हो गई। भारत माता के इस वीर सपूत के अंतिम दर्शन के लिए कोई घर की छत पर खड़ा था तो कोई दीवारों पर। गर्व और गम में डूबे गांव जनसूई में इतना जनसैलाब उमड़ गया कि गांव की गलियां ही छोटी पड़ गई। 
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पार्थिव शरीर पहुंचते ही रो पड़े लोग। - फोटो : अमर उजाला
सेना के काफिले में पहुंचे पार्थिव शरीर पर ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा करनी शुरू कर दी। बेटे के पार्थिव शरीर को देखकर मां हरभजन कौर कलेजे पर हाथ मारते हुए बोलीं, बेटा तेरी शहादत पर मुझे गर्व है। हर मां को रब तेरे जैसा लाल दे। पत्नी गुरविंद्र कौर का रो-रोकर बुरा हाल था। मां- दादी और पड़दादी सभी को रोता देख तीन साल का वंशदीप भी बिलख पड़ा। छह साल की बेटी मंदीप कौर भी मां के पास बैठी रोये जा रही थी। 
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- फोटो : अमर उजाला
शहीद निर्मल सिंह को आखिरी सलाम और दर्शन के लिए गांव के प्रवेश द्वार, गांव की पुलिया और यहां तक की गांव के बस अड्डे तक पर भीड़ लगी थी। गांव में शायद ही किसी के घर चूल्हा जला हो, क्योंकि सुबह 11 बजे से ही हर ग्रामीण बेटे के इंतजार में सड़क पर खड़ा हो गया था और शाम पांच बजे तक हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर ही रहे। 

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शहीद के अंतिम दर्शन को छत पर जुटे लोग। - फोटो : अमर उजाला
दो किलोमीटर पहले ही पलके बिछाए खड़े रहे युवा
पुंछ से दोपहर करीब साढ़े 12 बजे शहीद निर्मल सिंह का शव वायु स्टेशन अंबाला छावनी लाया गया। यहां से आर्मी के वाहन के माध्यम से पार्थिव शरीर को उनके घर तक लाया गया। जनसूई मोड़ पर दो किलोमीटर पहले ही गांव और आसपास के युवा तिरंगा हाथ में लेकर पलके बिछाए शहीद निर्मल का इंतजार कर रहे थे।
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शहीद के अंतिम दर्शन को छत पर खड़ीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
जैसे ही निर्मल सिंह के शव को लेकर सेना पहुंची तो यहां हिंदुस्तान जिंदाबाद, जब तक सूरज-चांद रहेगा, निर्मल तेरा नाम रहेगा, के नारे गूंजने लगे। इसके बाद युवाओं का यह काफिला मोटरसाइकिल रैली निकालते हुए सम्मान के साथ पार्थिव शरीर को लेकर गांव में सेना के साथ पहुंचा।
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रोते-बिलखते शहीद के परिजन। - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि पुंछ में पाकिस्तानी गोलाबारी में निर्मल सिंह शहीद हो गए थे। शाम करीब सवा चार बजे तीन वर्षीय बेटे वंशदीप ने उन्हें मुखाग्नि दी। मासूम बच्चे के हाथ पिता के अंतिम संस्कार को देख यहां हर आंख नम थी। आर्मी की टुकड़ी ने हथियार उल्टे करके, मातमी धुन बजाकर और हवा में गोलियां दागकर शहीद को सलामी दी। 
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रोते-बिलखते शहीद के परिजन। - फोटो : अमर उजाला
शहीद निर्मल सिंह का जन्म गांव जनसूई में हुआ। दादा भगवान सिंह की प्रेरणा से निर्मल सिंह वर्ष 2003 में दसवीं जम्मू कश्मीर राइफल में भर्ती हुए। दादा भी सेना से रिटायर्ड थे। निर्मल सिंह ने कई स्थानों और अग्रिम चौकियों पर रहकर देश की सेवा की।
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