म्यूजिक तो हर कोई सुनता है, लेकिन इससे जुड़ा एक सच बहुत कम लोग जानते हैं। रिसर्च में खुलासा हुआ है कि संगीत एक संजीवनी बूटी है। रिपोर्टः विनीत तोमर, रोहतक
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रिसर्चः 'संजीवनी बूटी' है म्यूजिक, 8 क्लिक करके जानिए कैसे?
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संगीत सुनने से न केवल हमारे दिलोदिमाग को राहत मिलता है, बल्कि संगीत की स्वर लहरियां हमारी सेहत के लिए संजीवनी बूटी का काम भी कर रही हैं। शास्त्रीय संगीत हो या फिर वोकल म्यूजिक सभी प्रकार का संगीत बीमारियों को कंट्रोल करने में सहायक होता है।
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संगीत मरीजों को उनके नकारात्मक अनुभव, अकेलेपन और उग्र व्यवहार को शांत करने में भी मददगार है। एमडीयू के मनोविज्ञान विभाग की ओर से सेहतमंद और बीमार लोगों पर की गई काउंसिलिंग में यह तथ्य सामने आया है।
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दरअसल, एमडीयू की डीन फैकल्टी ऑफ सोशल साइंस और मनोविज्ञान विभाग की प्रो. प्रोमिला बतरा ने स्थानीय स्तर पर संगीत को लेकर लोगों की काउंसिलिंग की। इसमें 25 के अधिक अंतरमुखी (स्वयं में सीमित रहना) और मिलनसार (घुमने-फिरने वाला) व्यक्तियों को शामिल किया गया।
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इसमें कुछ बीमार लोगों की भी काउंसिलिंग की गई। सभी को उनकी पसंद का संगीत सुनाया गया। संगीत से निकलने वाली सुर लहरियों से अंतरमुखी व्यक्ति में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ और उसके दिलो-दिमाग में पैदा हुई नकारात्मक धारणाएं खुद-ब-खुद खत्म हो गई।
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यह भी देखा गया कि संगीत से निकलने वाले ओपियाड्स का दर्द से पीड़ित व्यक्ति पर प्रभाव पड़ता है। ओपियाड्स से न केवल पीड़ित का दर्द से ध्यान हटा, बल्कि उसे राहत भी महसूस हुई। संगीत व्यक्ति के सोचने की शक्ति के साथ-साथ आत्मविश्वास को भी बढ़ता है।
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काउंसिलिंग के दौरान कुछ लोगों से उनके पसंदीदा संगीत के बारे में पूछा गया। सुबह उठते ही सबसे पहले उन्हें वही संगीत सुनाया गया। लगातार यह प्रक्रिया अपनाने के बाद लोगों की राय जानी गई। इस पर सभी ने बताया कि सुबह उठते ही मनपसंद संगीत सुनने से उनका दिन अच्छा गुजरा और पूरी तरफ वे तनाव से दूर रहे।
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एमडीयू की डीन फैकल्टी ऑफ सोशल साइंस प्रो. प्रोमिला बतरा कहती हैं कि संगीत को एक थेरेपी के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें म्यूजिक मेडिसीन और म्यूजिक थेरेपी भी कहा जाता है। संगीत थेरेपी के जरिये तनाव और अवसाद को दूर किया जा सकता है। नियमित संगीत सुनने से मन शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है। इससे रक्तचाप भी सुचारु होकर सकारात्मक विचार आते हैं।