मेरे जिगर का टुकड़ा था और उसे मेरी ही आंखों के सामने छलनी कर दिया। मैं कुछ नहीं कर पाईं, क्या जवाब दूंगी उसके पापा को। कहते कहते मां बेसुध हो गई।
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बाउंसर मीत की हत्या
मौका ए वारदात पर मौजूद बाउंसर मीत की मां से पुलिस ने पूछताछ की तो वह बदहवासी में बस यही कहती रही कि वह कभी अपने साथ मुझे मंदिर लेकर नहीं जाता था। आज ही गई थी और उसे मेरी आंखों के सामने गोलियां मार दी। अब मैं ऊपर जाकर उसके पापा को क्या जवाब दूंगी, कि मैं उनके जिगर के टुकड़े का ख्याल नहीं रख पाई।
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सकेतड़ी में दिनदहाड़े बाउंसर की गोलियां बरसाकर हत्या
मेरा मीत कई सालों से सकेतड़ी मंदिर में माथा टेकने के लिए आता था। उसने कभी यह रिवायत तोड़ी नहीं थी। आंधी आए या तूफान भोले बाबा के दर्शन सोमवार के दिन वह जरूर करता था। सकेतड़ी के मंदिर वह हमेशा अकेले ही आता था, मैं कभी भी उसके साथ मंदिर नहीं आई। यह पहली बार था जब मैं मीत के साथ आई थी। यह दर्द मीत की मां रूपरानी का है।
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saketri murder
हमने एक साथ माथा टेका, साथ ही बाहर भी आए। एक भिखारी ने मेरा रास्ता रोक लिया। उसे पैसे देने लगी। आगे जाने पर भी मीत का ध्यान मेरी तरफ था। वह मुझे देखते हुए कार का दरवाजा खोल रहा था। उसने देखा ही नहीं कुछ नकाबपोश उस पर गोलियां चलाने की तैयारी कर रहे हैं। हमलावरों ने पीछे की तरफ से गोलियां चलाईं। 12 के करीब गोलियां चली होंगी।
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saketri murder
मैंने पुलिस को बुलाने की कोशिश की, लेकिन वहां कोई नजर नहीं आया। जिन दरिंदों ने मेरे बेटे पर गोलियां चलाई उन्होंने चेहरा ढका था, लेकिन उनकी गाड़ी पर पीली नंबर प्लेट थी। पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर में दो घंटे जमीन पर बैठे बेटे का इंतजार करती रूपरानी ने कहा कि बेटा उन दरिंदों को जरूर पहचानता होगा, जैसे ही डॉक्टर ठीक कर देंगे वह पुलिस को बता देगा कि उस पर हमला किसने किया।
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बाउंसर मीत की हत्या
मीत के दोस्त जितेंदर ने बताया कि मीत के पिता कांट्रैक्टर थे। कुछ साल पहले उसके पिता की मौत जीरकपुर में सड़क हादसे में हुई थी। उसके बाद मीत पर परिवार की पूरी जिम्मेवारी भी आ गई। मीत की एक बहन, एक छोटा भाई, उसकी मां, पत्नी और 3 साल का बेटा है। मीत की मां की पसंद से वर्ष 2012 में उनकी अरेंज मैरिज हुई थी।
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बाउंसर मीत की हत्या
सकेतड़ी में अमित शर्मा उर्फ मीत की हत्या के साथ ही उनका दोस्तों को जोड़ने का कारवां भी रुक गया। मीत ने पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान फ्रेंड सर्कल को बढ़ाने के लिए एक ग्रुप बनाया था, जिसमें अभी तक 300 से ज्यादा लोग शामिल हैं। मीत को एक साल पहले शिरोमणि अकाली दल से चंडीगढ़ में युवाओं का नेतृत्व करने की जिम्मेवारी सौंपी गई थी।
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बाउंसर मीत की हत्या
मीत के दोस्त जितेंदर उर्फ कालू ने बताया कि मीत ने वर्ष 2004-05 में पीयू से बीए की। इस दौरान उसने एनएसयूआई को अपनी टीम के साथ सपोर्ट किया। मीत काफी तेजी से स्टूडेंट्स में फेमस होने लगा और बाद में उसने अपना समर्थन पूसू और बाद में सोपू को दिया। मीत ने यूनिवर्सिटी के समय में खुद कभी चुनाव नहीं लड़ा। कालू ने बताया कि यूनिवर्सिटी छोड़ने के बाद भी उसका सर्कल बनता रहा। दोस्तों ने कहा कि मीत कभी किसी को मदद से इनकार नहीं करता था।
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बाउंसर मीत की हत्या
टीम की मदद में बढ़ने लगे मीत के दुश्मन
कालू ने बताया कि मीत की सीधे तौर पर किसी से दुश्मनी नहीं थी। अपनी टीम के सदस्यों के समर्थन और उनकी तरफ से पैरवी करने के कारण मीत के दुश्मन तेजी से बढ़ने लगे। 2015 में दोस्तों की सलाह के बाद मीत ने शिअद ज्वाइन कर ली थी।
मीत की फैमिली अकेली नहीं, हमारी जिम्मेवारी
मीत की हत्या के बाद मनीमाजरा स्थित उसके घर पर 150 से ज्यादा दोस्त पहुंच गए। उन्होंने कहा कि मीत के पिता की मौत हो चुकी है और उसका छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है, लेकिन उसकी फैमिली अकेली नहीं है उनके खर्चे और सुरक्षा की जिम्मेवारी मीत द्वारा बनाई सर्कल टीम की है।