बेटी जन्मी तो झाड़ियों में फेंक दी। वह अखबार में लिपटी थी और आसपा चूहे घूम रहे थे। पुलिस ने तो और शर्मनाक हरकत कर डाली, पर समय रहते बच्ची को बचा लिया गया।
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झाड़ियों में मिली नवजात
घटना हरियाणा के पंचकूला की है। सेक्टर आठ के खाली पड़े एक प्लॉट में महिला को नवजात बच्ची पड़ी मिली। शनिवार सुबह कोठियों में काम करने वाली महिला ने पार्क के पास झाड़ियों में अखबार में लिपटी कोई चीज हिलती दिखाई दी। आस पास चूहे भी घूम रहे थे। महिला को शक हुआ और उसने चूहे भगाए। अखबार हिलाकर देखा तो बच्ची के रोने की आवाज आने लगी। महिला ने लोग इकट्ठे किए और पुलिस को सूचना दी।
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झाड़ियों में मिली नवजात
मौके पर सेक्टर-7 पुलिस चौकी से पुलिस मुलाजिम भी पहुंचे और बच्ची को तुरंत जनरल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बच्ची का चेकअप किया तो हालत नाजुक थी। जांच में पता चला कि बच्ची का जन्म 12 घंटे पहले ही हुआ था। करीब पांच घंटे तक जनरल अस्पताल में बच्ची का इलाज कर उसे चंडीगढ़ पीजीआई रेफर किया गया। जब बच्ची को रेफर किया गया तो बच्ची की हालत पहले से कुछ बेहतर थी।
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एचओडी डॉ. मुक्ता ने बताया कि बच्ची को जब अस्पताल लाया गया था तो उसका शरीर नीला पड़ा था। सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। लगता है कि बच्ची का जन्म प्री मेच्योर डिलीवरी है। बच्ची नौ माह के बजाय करीब साढ़े सात आठ माह में जन्मी है। सिविल सर्जन वीके बंसल ने बताया कि बच्ची ऑक्सीजन मेंटेन नहीं कर पा रही थी। जिसके चलते उसे पीजीआई में एसएनसीयू में दाखिल कराया गया।
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वहीं दूसरी ओर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन मामले में पंचकूला पुलिस की लापरवाही नजर आई, जिसके कारण बच्ची की जान जा सकती थी। क्योंकि जब बच्ची को पीजीआई ले जाया गया तो एंबुलेंस में न तो पंचकूला पुलिस से कोई साथ आया था और न ही एमएलसी। जनरल अस्पताल का स्टाफ साथ था। एमएलसी न होने की वजह से पीजीआई में डॉक्टरों ने बच्ची को एडमिट करने से मना कर दिया।
लेकिन बच्ची की बिगड़ती हालत देखकर पीजीआई डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू कर दिया। बच्ची का इलाज शुरू होने के करीब एक घंटे बाद पुलिसकर्मी नरेंद्र कुमार पहुंचा। इस समय भी पुलिसकर्मी के पास अस्पताल में कटी एमएलसी नहीं थी। डॉक्टरों का कहना था कि उनके पास इतने हेल्पर नहीं है कि इस बच्ची को भी देख सके। बच्ची की हालत नाजुक है। इसके बावजूद पुलिसकर्मी बच्ची को अकेला ही छोड़ आया।