कहते है जिंदगी और मौत भगवान के हाथ में है, लेकिन इस बाबा को ईश्वर ने शायद दूसरा जन्म दे दिया और कुदरत का करिश्मा इसे ही कहते हैं।
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मौत के मुंह से वापिस लौट आया बाबा
मामला ऐसा है कि डॉक्टर भी इसे चमत्कार ही कर रहे हैं, वरना चाकू इधर से जरा उधर होता तो जान चली जाती। 5 घंटे तक बाबा गर्दन में आर पार हुए चाकू के साथ घूमता रहा, फिर 11 घंटे में ऑपरेशन हुआ और बाबा की जान बच गई। अब वह बिल्कुल स्वस्थ है। घटना हरियाणा के करनाल की है। जनकपुरी स्थित एक मंदिर के महंत की गर्दन में उसी के चेले ने कैंचीनुमा नुकीले हथियार आर पार कर दिया। इससे महंत गंभीर रूप से घायल हो गया।
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मौत के मुंह से वापिस लौट आया बाबा
आसपास के लोग बाबा को इलाज के लिए कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर लेकर पहुंचे। सुबह छह बजे से लेकर 11 बजे तक महंत ट्रामा सेंटर में ऐसे ही घुमता रहा, लेकिन उसका इलाज नहीं हो पाया। घायल होने के बाद बाबा ऐसे ही दर्द से कर्राता रहा, लेकिन ट्रामा सेंटर में तैनात डॉक्टरों ने बाबा को प्राथमिक उपचार भी नहीं दिया। अस्पताल पहुंचने के पांच घंटे तक बाबा ऐसे ही गले में धंसा कैंचीनुमा हथियार लेकर घुमता रहा।
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मौत के मुंह से वापिस लौट आया बाबा
मीडियाकर्मियों की नजर पड़ी तो उन्होंने यह मुद्दा जोर शोर से उठाया। उसके बाद सिटी थाना पुलिस ने मामले में संज्ञान लिया और बाबा के ब्यान दर्ज किए। इसके बाद ही डॉक्टरों ने बाबा के इलाज की प्रक्रिया शुरू की। देर शाम बाबा का ऑप्रेशन हुआ। फिल्हाल महंत ट्रामा सेंटर के आईसीयू में दाखिल है। फिलहाल बाबा की हालात ठीक है। इस प्रकार साढ़े छह सौ करोड़ रुपये से बने मेडिकल कॉलेज में बाबा की गर्दन से कैंची निकालने में 11 घंटे का समय लग गया।
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पुलिस जांच अधिकारी गुरुपाल ने बताया कि मामले में आरोपी चेले के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। बता दें कि ऐसे ही कारनामों को लेकर मेडिकल कॉलेज शुरू से ही चर्चाओं में रहा है। यहां के डॉक्टर घायलों का इलाज की बजाए रेफर करने का काम करते हैं। ट्रामा सेंटर में स्ट्रेचरों की बहुत कमी है। इस कारण गंभीर रूप से घायल अधिकतर मरीजों को उनके परिजन गोद में उठाकर ही ट्रामा सेंटर में पहुंचाते है।
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मौत के मुंह से वापिस लौट आया बाबा
गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में अक्सीजन सप्लाई ठप होने से हुई 30 मासूमों सहित 48 लोगों की मौत को लेकर कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी दिनभर हडकंप मचा रहा। बार बार कॉलेज प्रबंधन सदस्य अक्सीजन और टैंक को जांचते रहे। ताकि यहां इस प्रकार की कोई भी दिक्कत न आए। बता दें कि मेडिकल कॉलेज के पास अक्सीजन के लिए कोई स्थाई प्रबंध नहीं है। फिलहाल एक लॉकल कंपनी के सहारे अक्सीजन का काम चलाया जा रहा है।
बाबा की गर्दन में कैंची आरपार हो गई थी। यह बहुत संवेदनशील था। गर्दन में खाने और सांस की नलियां होती हैं। इसी के साथ रीढ़ की भी हड्डी होती है। इस कारण इसका सावधानी पूर्वक ऑपरेशन किया गया। अगर नलियों में थोड़ा सा भी कुछ लग जाए तो मरीज की जान जा सकती है। रीढ़ की हड्डी होने के कारण विशेष ध्यान रखना पड़ा। यही वजह रही कि बाबा के इलाज में समय लग गया। अब बाबा स्वस्थ हैं।
- डॉ. जगदीश दुरेजा, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज करनाल