देश के युवाओं को आतंकियों के चंगुल से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक खास योजना तैयार की है, जिससे एक तीर से दो निशाने लगेंगे।
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आतंकवादी
एक तो युवा आतंकियों से बचेंगे, दूसरा खेलों की तरफ उनका रुझान बढ़ेगा। जम्मू कश्मीर और नक्सल प्रभावित इलाकों में आतंकी संगठनों की जद से युवाओं को बचाकर उन्हें खेलों की ओर प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय खेल मंत्रालय ने एक खास योजना बनाई है। केंद्रीय खेल मंत्रालय ने जम्मू एवं कश्मीर को इसके तहत स्पेशल स्पोर्ट्स पैकेज के अंतर्गत शामिल किया है, जिस पर काम शुरू कर दिया गया है।
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खेल मंत्रालय ने अपने सालाना बजट (2017-18) 1943 करोड़ रुपये में से करीब 200 करोड़ जेएंडके को जारी करने की योजना बनाई है। केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में आतंक के खिलाफ सरकार की खेल प्रोमोशन पॉलिसी का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि घाटी में आज किशोर व युवा आतंकी संगठनों के टारगेट में हैं।
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- फोटो : google
ये संगठन युवकों को गुमराह कर आतंक की राह पर चलने को विवश कर रहे हैं। लेकिन सरकार ने महसूस किया है कि घाटी के किशोरों और युवाओं में जबरदस्त खेल प्रतिभा है, इसलिए सरकार मजबूत खेल पॉलिसी के जरिए युवाओं व किशारों को खेलों की ओर प्रोत्साहित करेगी, ताकि वे अपने भविष्य को खेलों की मदद से संवार सके, न कि आतंक की राह पर जाएं।
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- फोटो : Demo Photo
घाटी में ये दी जाएंगी खेल सुविधाएं
जम्मू कश्मीर के स्पोर्ट्स पैकेज में 97.49 करोड़ से घाटी के छह बड़े स्टेडियम और एक फुटबाल ग्राउंड को आधुनिक खेल सुविधाओं से लैस किया जाएगा। 6 करोड़ से पहलगाम और मानेसर लेक में भी वॉटर स्पोर्ट्स एक्टिविटी का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जाएगा। 88 करोड़ से 22 इंडोर स्पोर्ट्स हॉल बनाए जाने हैं। इसके अतिरिक्त खेल उपकरणों पर भी5.37 करोड़ से अधिक खर्च किए जाएंगे।
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तमाम खेल मैदानों की मरम्मत व बढ़िया लेवलिंग की जाएगी। घाटी के 100 खेल प्रशिक्षकों को दिल्ली में एडवांस स्पोर्ट्स ट्रेनिंग दी गई है और ये सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। युवा और किशोर आतंकी संगठनों के टारगेट पर हैं। इस बाबत सेना भी अलर्ट कर चुकी है। सेना के एक आला अफसर के अनुसार स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों व पुलिस की मदद से विगत दिनों जंगल से कुछ किशोरों को सुरक्षित बचाया गया था।
आतंकी संगठन के गुर्गे उन्हें बरगलाकर सीमा पार करवाने की फिराक में थे, ताकि उनको आतंकी गिरोहों में शामिल किया जा सके। लेकिन जवानों को देखकर वे फरार हो गए। इसके अलावा विभिन्न संगठनों के कुछेक ऐसे चेहरे भी सामने आए हैं, जो कभी स्कूल स्तर पर अच्छे खिलाड़ी थे, लेकिन आज वे आतंकी बन गए हैं।