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दिल्ली की राजनीति से दूर, जान देने वाले पूर्व सैनिक की पत्नी ने रखी ये मांग

Thu, 03 Nov 2016 04:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, भिवानी
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पूर्व फौजी रामकिशन के सुसाइड पर सियासत चरम पर है, लेकिन इस सियासत से दूर उस सैनिक की पत्नी की मांग सुनिए।
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जान देने वाले पूर्व सैनिक की पत्नी की मांग, मिले शहीद का दर्जा

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पूर्व सैनिक रामकिशन की पत्नी और बेटे ने रखी मांग
फौज की करीब 35 साल की नौकरी के दौरान 1971 में पाकिस्तान युद्ध लड़ा। रिटायरमेंट के बाद लोगों के हक-हकूक की लड़ाई के लिए सरपंच बने और अब वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) आंदोलन के लिए जान दी। कुछ इस तरह के उतार-चढ़ावों से भरा रहा है दिल्ली में जंतर-मंतर पर चल रहे ओआरओपी आंदोलन के दौरान खुदकुशी करने वाले रामकिशन ग्रेवाल (65) का जीवन। 
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पूर्व सैनिक रामकिशन की पत्नी और बेटे ने रखी मांग
मंगलवार रात रामकिशन ग्रेवाल की मौत की खबर के बाद परिजन व ग्रामीण स्तब्ध हैं। बुधवार को दिनभर गांव में रामकिशन के जुझारूपन और जज्बे की चर्चा होती रही। शव गांव लाए जाने पर वीरवार को अंत्येष्टि की जाएगी। पति की मौत से गमजदा रामकिशन की पत्नी किताबो देवी ने कहा कि उसके पति ने ओआरओपी आंदोलन व सैनिकों के लिए जान दी है। 

जान देने वाले पूर्व सैनिक की पत्नी की मांग, मिले शहीद का दर्जा

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पूर्व सैनिक रामकिशन की पत्नी और बेटे ने रखी मांग
किताबो देवी ने कहा कि अब हम केवल इतना चाहते हैं कि उन्हें शहीद का दर्जा मिले और उनकी अंत्येष्टि राजकीय सम्मान के साथ हो। किताबो ने बताया कि वे 31 अक्तूबर को खुश मूड में दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। इसके बाद क्या हुआ, उसे पता नहीं। आज उनकी मौत की खबर आई। 
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पूर्व सैनिक रामकिशन की पत्नी और बेटे ने रखी मांग
रामकिशन के बेटे कुलवंत ने बताया कि उनके पिता ने ओआरओपी आंदोलन व सैनिकों के लिए अपनी जान दी है। उनके पिता की मौत के बाद हो रही पॉलिटिक्स से कोई मतलब नहीं है। हम तो केवल यह चाहते हैं कि उनके पिता को शहीद का दर्जा मिले। गांव के ही रिटायर्ड सूबेदार उम्मेद सिंह ने भी रामकिशन की सक्रियता की तारीफ की।
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पूर्व सैनिक रामकिशन की पत्नी और बेटे ने रखी मांग
गांव में रामकिशन के बारे में कर्जायत होने की भी चर्चा है, हालांकि उनके परिवार ने इसकी पुष्टि नहीं की है। रामकिशन के चार बेटे बेरोजगार हैं और खेती के लिए भी जमीन नहीं है। बड़ा बेटा दिलावर हरियाणा पुलिस में हेड कांस्टेबल हैं और फतेहाबाद में तैनात हैं। 
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पूर्व सैनिक रामकिशन की पत्नी और बेटे ने रखी मांग
एक बेटा जसवंत जेबीटी पास आउट है तो बलवंत एमए मैथ और बलविंद्र एमए इंग्लिश हैं। कुलवंत दसवीं पास है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार में एक ही व्यक्ति के रोजगारशुदा होने के अलावा पेंशन ही गुजर-बसर का साधन था।  

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पूर्व सैनिक रामकिशन की पत्नी और बेटे ने रखी मांग
सेना की डिफेंस सिक्योरिटी कापर्स  (डीएससी) से 2004 में सूबेदार पद से रिटायर होने वाले रामकिशन 1971 की लड़ाई से कुछ समय पहले फौज में भर्ती हुए थे। पाकिस्तान के साथ युद्ध में हिस्सा लिया। रिटायरमेंट के बाद आते ही गांव वालों ने उन्हें सरपंच बना दिया। बामला-सेकेंड पंचायत से वे करीब छह सौ मतों की जीत से सरपंच चुने गए। उनकी सरपंची के दौरान बामला को निर्मल ग्राम का पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार रामकिशन ने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के हाथों लिया।

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पूर्व सैनिक रामकिशन की पत्नी और बेटे ने रखी मांग
जंतर-मंतर पर रामकिशन की मौत की सूचना बुधवार सुबह न्यूज चैनल पर चली तो शहर से 12 किलोमीटर दूर स्थित बामला गांव में मीडिया का मजमा लग गया। दोपहर बाद एक न्यूज चैनल की ओबी वैन व पत्रकारों का आना-जाना शुरू हो गया। रामकिशन के चार बेटे व एक बेटी दिल्ली में अपने पिता के शव के साथ हैं। एक बेटा कुलवंत व उसकी बहन सुमित्रा अपनी माता को ढांढस बंधा रहे हैं। 
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पूर्व सैनिक रामकिशन की पत्नी और बेटे ने रखी मांग
पिता की मौत के बाद दिल्ली पहुंचे रामकिशन के बेटे कुलवंत ने अमर उजाला को फोन पर बताया कि दिल्ली पुलिसकर्मियों ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उसके साथ भी मारपीट की। उसे चोट लगी। उनके साथ यह वाकया उस समय हुआ, जब पुलिस दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार कर रही थी।
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