कुंपवाड़ा में हुए मुठभेड़ में शहीद हुए जवान की पत्नी ने कहा है कि पाकिस्तान को खत्म कर देना चाहिए, ताकि रोज-रोज काली दिवाली ना मनानी पड़े।
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शहीद मनदीप के गांव में नहीं मनाई जाएगी दीवाली
पाकिस्तानी सेना और आतंकियों के हमले में कुरुक्षेत्र के गांव अंतेहड़ी निवासी मनदीप सिंह शहीद हो गए। एक सप्ताह के अंदर जिले के दूसरे जवान ने देश की रक्षा करते अपनी शहादत दी है। मनदीप 17 सिख रेजिमेंट में सिपाही पद पर तैनात थे। कुंपवाड़ा के माच्छिल सेक्टर में शुक्रवार शाम सीमा पार से हुए हमले में डटकर मुकाबला करने के बाद आखिर मनदीप शहीद हो गए।
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कुंपवाड़ा में हुए मुठभेड़ में शहीद हुए मनदीप सिंह
मनदीप सिंह के शहीद होने की खबर परिजनों को मिलते ही घर में कोहराम मच गया। गम में डूबी शहीद की पत्नी प्रेरणा ने कहा कि पाक पर हमला कर एक ही बार में खत्म कर देना चाहिए, ताकि रोज-रोज काली दिवाली न माननी पड़े। पाकिस्तान की हरकतों पर आक्रोशित शहीद के भाई ने एक सिर के बदले दस सिर लाने को कहा।
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शहीद मनदीप सिंह का रोता-बिलखता परिवार
पूरा गांव दिवाली की खुशियों में डूबा था, लेकिन गांव के लाड़ले के शहीद होने की खबर मिलते ही मातम छा गया। परिजनों को सांत्वना देने के लिए सुबह ही ग्रामीणों का तांता लग गया। पुलिस और प प्रशासन के भी आलाधिकारी पहुंचे। मनदीप के पार्थिव शव का अंतिम संस्कार रविवार को होगा।
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शहीद मनदीप सिंह का रोता-बिलखता परिवार
अंतेहड़ी निवासी मनदीप करीब 7 वर्ष पहले सेना में भर्ती हुए थे। फिलहाल वे सिपाही के पद पर तैनात थे। उनकी पत्नी प्रेरणा हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल पद पर तैनात हैं। प्रेरणा ने कहा उसे अपने पति की शहादत पर गर्व है। पाकिस्तान ने जिस ढंग से बर्बरता की है कि भारत को इसका जवाब देना चाहिए।
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शहीद मनदीप सिंह का रोता-बिलखता परिवार
शहीद के पिता 55 वर्षीय फूल सिंह और बड़े भाई संदीप का रो-रोकर बुरा हाल था। दोनों को मनदीप की शहादत का फक्र है और पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा भी। फूल सिंह ने कहा कि सैनिकों की शहादत का बदला सरकार को लेना चाहिए। भाई संदीप ने बताया कि मनदीप शनिवार को ही छुट्टी पर आने वाले थे। दीपावली का त्योहार परिवार के साथ ही मनाने वाले थे।
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शहीद मनदीप सिंह का रोता-बिलखता परिवार
मनदीप के शहादत की खबर से पूरे गांव में मातम छा गया है। गलियों में लोग आ-जा जरूर रहे थे, लेकिन अजीब सा सन्नाटा भी था। हर कोई मनदीप के घर की ओर से जा रहा था। गांव में जितनी भी दुकानें थीं, दिन भर बंद रहीं। गांव में एक ही घर से आवाजें आ रही थीं। वह घर मनदीप का ही था, जहां परिजनों के अलावा उन्हें ढांढस बंधाने पहुंचे लोग भी रो रहे थे।
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शहीद मनदीप सिंह का रोता-बिलखता परिवार
डीसी सुमेधा कटारिया शहीद मनदीप के घर पहुंचीं और उसकी पत्नी व मां को ढांढस बंधाया, लेकिन मां से मिलने के बाद डीसी खुद भावुक हो गईं और उनकी आंखों में भी आंसू छलक गए। हालांकि किसी तरह उन्होंने खुद पर काबू पाया और परिजनों को सांत्वना दी। डीसी के अलावा कई प्रशासनिक अधिकारी और नेता भी परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे। राज्यमंत्री कृष्ण बेदी, इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा, विधायक पवन सैनी भी पहुंचे।
शहीद मनदीप का पार्थिव शरीर रविवार को साढ़े तीन बजे कुरुक्षेत्र लाया जाएगा। ऐसे में परिजनों ने अंतिम संस्कार की तैयारी भी कर ली थी। लेकिन बताया जाता है कि पार्थिव शरीर को अभी अंबाला में रखा गया है। यहां से रविवार को कुरुक्षेत्र और फिर गांव में ले जाया जाएगा।