मणिपुर आतंकी हमले में शहीद हुए हरियाणा के झज्जर जिले के मेजर अमित देशवाल के बलिदान पर उनके मां-बाप बेहद गर्व है। उनका पार्थिव शरीर शुक्रवार को झज्जर के गांव सुरेहती में पहुंचेगा, जहां उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।
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जानिए शहीद मेजर अमित के बारे में सब कुछ, गर्वित हैं मां-बाप
अमित मणिपुर के तामेंगलोंग जिले में उग्रवादी संगठन एनएससीएन और जेडयूएएफ के खिलाफ देश की रक्षा के लिए चलाए जा रहे एक विशेष आप्रेशन से जुड़े सुरेहती के रणबांकुरे मेजर अमित देशवाल ने आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गए।
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अमित ने बहादुरी से लड़ते हुए एक आतंकी को मार गिराया, इस बीच एक आतंकी की गोली उनके सीने के आर-पार हो गई। घायल अमित को अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
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अमित के इस बलिदान पर उनके परिजनों को गर्व है। उनके मां-बाप का कहना है कि हमें ऐसे ओर बेटों की जरूरत है, जो देश के लिए अपनी जान देकर सवा करोड़ भारतीयों की रक्षा करने से पीछे नहीं हटते।
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बेटे की मोत की खबर सुनते ही शहीद की माँ बेदवती की आंखों से आंसू सूखने का नाम नही ले रहे हैं। बार बार बेटे की याद में बेसुद हो कर गिर रही माँ को एक तरफ तो बेटे के शहीद होने पर गर्व है। लेकिन उसकी बचपन की यादों को वो भुला नही पा रही ।
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शहीद अमित के भाई अंकित ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके बड़े भाई ने देश के लिए लड़ते हुए अपनी जान दे दी।परिजनों का कहना था कि अमित हमेशा से पढ़ाई में अच्छा था और देश सेवा के लिए सेना में जाना चाहता था।
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घर के गमगीन माहौल में परिजनों के साथ साथ उनके गांव वालों को उनके बचपन से जुड़े किस्सों के बारे में आपस में बात करते देखा गया। एक स्थानीय संत सुरेहती ने बताया कि उन्हें उनकी अनुकरणीय वीरता के लिए उन्हे हमेशा याद किया जाएगा। उन्होने कहा कि अमित बचपन से ही बहादुर और सबके साथ मेल मिलाप के साथ रहने वाला लड़का था।
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शहीद मेजर अमित देशवाल का जन्म 15 जनवरी 1975 को गांव सुरेहती में हुआ था। इत्फाकन इसी दिन आर्मी दिवस भी मनाया जाता है। 5वीं तक की पढाई गांव में ही पूरी करने के बाद, कक्षा 6 से 8वीं तक की पढाई अंबाला में अपनी मौसी के घर पूरी की। 9वीं से 12वीं की पढाई के लिए कें द्रीय विधालय प्रथम नासिक में भेजा गया। क्योकि इनके पिता ऋषिराम देशवाल की पोस्टिंग भी नासिक में ही थी।
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गुरू गोविंद सिंह कॉलेज दिल्ली से सन् 2004 में बीए की पढाई पूरी की। शहीद अमित के भाई अंकित ने बताया कि 1 जनवरी 2005 को डेढ साल की ट्रैनिंग पूरी करने के बाद 10 जून 2006 को आल इंडिया सीडीएस कमीसन में लेफ्टिनेंट पद से भर्ती हुए। सन् 2006 में कैप्टन के पद पर उन्हे प्रमोट कर दिया गया। कई जानलेवा अभियानों में सफलता प्राप्त करते हुए मिशन को पूरा करने पर वर्ष 2012 में उन्होने फोज में रहते हुए मेजर पद की बागडोर संभाली।
अंकित का कहना था कि अमित एक बेहतरीन खिलाड़ी भी था, जो कि इंटर यूनिवर्सिटी वालीवाल प्रतियोगिता में भी भाग ले चुका है। शहीद अमित कई खतरनाक आप्रेशनों में विजयी होने के बाद उनको स्पेशल फोर्स के लिए चुना गया। वर्ष 2016 में उन्होने इलाईट सर्विस जवाइन की और घातक नामक आप्रेशन के बेस्ट स्टूडेंट का सममान भी दिया गया। 11 मई 2009 में नीता के साथ शादी के बंधन में बंधने वाले शहीद अमित देशवाल के पास करीब 3 साल का बेटा है। अमित अपने बेटे व पत्नी नीटा के साथ हाल में असम के जोहराट में रहता था। उसके परिजन करीब एक झज्जर शहर के सैक्टर 6 में रह रहे हैं।