बैंक पीओ, क्लर्क, एसएससी समेत कई सरकारी नौकरियां मिलीं, लेकिन सपना एचसीएस बनने का था। पढ़ें ऐसे ही 5 अफसरों की सफलता की अनोखी कहानियां।
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यमुनानगनर की ईशा कांबोज
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बैंक पीओ, क्लर्क, एसएससी समेत कई सरकारी नौकरियां मिलीं, लेकिन सपना एचसीएस बनने का था। यमुनानगनर की ईशा कांबोज को यूपीएससी परीक्षा पास (910 वां रैंक) करने पर आईआरपीएस में सलेक्शन मिली थीं, लेकिन एचसीएस की मेरिट में नाम आने पर अब वे एचसीएस ही ज्वाइन करेंगी। ईशा दिल्ली में हैं। ईशा के पिता प्रीतम कांबोज ने बताया कि बेटी हर बार यही कहती थी कि उसे एचसीएस या आईएएस बनना हैं और उसका ये सपना पूरा भी हो गया।
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श्वेता सुहाग
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हरियाणा रोडवेज में हेड क्लर्क राकेश सुहाग की बेटी श्वेता की मेहनत और लगन रंग लाई है। श्वेता सुहाग का कहना है कि कभी भी आधे-अधूरे मन से काम नहीं करना चाहिए। इससे कोई काम पूरा नहीं होता है। जिस भी काम में हाथ डालो, उसमें पूरी जान लगा दो। श्वेता ने इसी सिद्धांत पर काम किया। चार-चार सरकारी नौकरियां (एसबीआई का पीओ, इंटेलीजेंस ब्यूरो में इंस्पेक्टर, एएसआरबी में सेक्शन ऑफिसर, असिस्टेंट कमांडेंट) हाथ में आने के बावजूद उन्होंने एचसीएस बनने की चाहत को नहीं छोड़ा और अंत में अधिकारी बनने में कामयाबी हासिल की।
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सुरेंद्र बेनीवाल
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कैथल के चंदाना गांव के सुरेंद्र बेनीवाल का एचसीएस प्रोपर में सिलेक्सन हुआ। सुरेंद्र पिछले आठ से सिविल सर्विस की तैयारी में लगा हुआ था। सुरेंद्र बेनीवाल मौजूदा समय में चौ. देवीलाल पॉलीटेक्नीकल नाथूसरी चौपटा में अंग्रेजी के प्राध्यापक हैं। पिछले सात-आठ साल से हरियाणा सिविल सर्विस की तैयारी करने में लगे हुए थे। वर्ष 2008 में भी एचसीएस की मुख्य परीक्षा पास की थी, लेकिन उनका सिलेक्सन नहीं हुआ। इसके बाद भी रूटिन में सुरेंद्र प्रतिदिन छह घंटे की तैयारी करते रहे।
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मनदीप शर्मा
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लेक्चररशिप छोड़कर बने एचसीएसः भूना के गांव जांडली कलां के मनदीप शर्मा हरियाणा सिविल सर्विसेज की लिखित परीक्षा पास कर एचसीएस बन गए हैं। मंदीप शर्मा ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जांडली कलां से अपनी पढ़ाई की थी। एमटेक के बाद संत हरचंद सिंह लोंगोवाल यू्निवर्सिटी संगरूर में लेक्चररशिप छोड़ चुके हैं।
फेरी लगाकर कुल्फी बेचते थे जितेंद्रः डबवाली के रहने वाले जितेंद्र कुमार डबवाली से पहले एचसीएस अफसर बने हैं। पिता की मौत के बाद मां भतेरी देवी ने जितेंद्र, उसके एक भाई व दो बहनों को मेहनत-मजदूरी करके पढ़ाया। जितेंद्र फेरी लगाकर कुल्फी बेचते थे। सितंबर 2013 में उन्होंने एचसीएस की परीक्षा उतीर्ण की। सहायक रोजगार अधिकारी नियुक्त हुए। मार्च 2016 में एचसीएस मेन की दोबारा परीक्षा दी। अब एसडीएम बने 29 एचसीएस (एग्जिक्यूटिव श्रेणी) अधिकारियों में जितेंद्र का नाम शामिल हैं।