51 साल बाद दो शुभ संयोगों के साथ शिवरात्रि का त्योहार आया है, इसलिए शिवलिंग पर भूलकर भी ये 10 चीजें न चढ़ाएं, महादेव नाराज हो जाएंगे।
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शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा
चंडीगढ़ में सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र के मुताबिक, 13 फरवरी को मंगलवार है और ऐसा संयोग 51 साल के बाद आया है। मंगलवार को महाशिवरात्रि का पर्व बहुत शुभ होता है क्योंकि मंगलवार का दिन हनुमान जी का होता है।
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शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा
मिश्र के मुताबिक, इस बार शिवरात्रि श्रवण नक्षत्र और सिद्ध योग में होगी। इसके चलते यह सवार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। यह योग मनोकामनाएं पूरी करने वाला है। इसलिए भक्त जान चार प्रहर की पूजा करके भोले को खुश करें, मन की इच्छाएं पूरी हो जाएंगी।
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शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा
मिश्र के मुताबिक, शिवरात्रि सदैव अर्द्ध रात्रि को ही मानी जाती है। इस बार 12 फरवरी सोमवार को रात 8:07 बजे से त्रयोदशी यानी प्रदोष लग रहा है, जो 13 फरवरी मंगलवार को रात 10:38 बजे तक रहेगा। 13 फरवरी की रात 11 बजकर 46 मिनट से अष्टम मुहूर्त प्रारंभ रहेगा, जो पूरी रात रहेगा।
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शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा
14 फरवरी को रात 12 बजकर 46 मिनट के बाद अष्टम मुहूर्त मिलता है, इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व 13 फरवरी को ही होगा और व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा। महाशिवरात्रि की पूजा का मुहूर्त 13 फरवरी को रात 10 बजे के बाद शुरू होगा जिसका पारण काल का मुहूर्त 14 फरवरी तक रहेगा।
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शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा
पहले प्रहर पूजा का समय: शाम 18:05 से 21:20 तक। रात के दूसरा प्रहर में पूजा का समय : रात 21:20 से 00:35 तक। तीसरा प्रहर पूजा का समय = 00:35 से 03:49 तक। चौथा प्रहर पूजा का समय = 03:49 से 07:04 तक
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शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा
- फोटो : amar ujala
शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को यदि प्रसन्न करना चाहते हैं तो इस दिन काले रंग के कपड़े ना पहनें। कहा जाता है की भगवान शिव को काला रंग पसन्द नहीं है, जिसके कारण इस दिन काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए। भगवान शिव को सफेद फूल बहुत पसंद होता है, लेकिन केतकी का फूल सफेद होने के बावजूद भोलेनाथ की पूजा में नहीं चढ़ाना चाहिए। भगवान शिव की पूजा करते समय शंख से जल अर्पित नहीं करना चाहिए।
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शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा
- फोटो : amar ujala
भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित माना गया है। शिव की पूजा में तिल नहीं चढ़ाया जाता है। तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ माना जाता है, इसलिए भगवान विष्णु को तिल अर्पित किया जाता है लेकिन शिव जी को नहीं चढ़ता है। भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाया जाना चाहिए। शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। शिव प्रतिमा पर नारियल चढ़ा सकते हैं, लेकिन नारियल का पानी नहीं।
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शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा
हल्दी और कुमकुम उत्पत्ति के प्रतीक हैं, इसलिए पूजन में इनका प्रयोग नहीं करना चाहिए। बिल्व पत्र के तीनों पत्ते पूरे होने चाहिएं, खंडित पत्र कभी न चढ़ाएं। चावल सफेद रंग के साबुत होने चाहिएं, टूटे हुए चावलों का पूजा में निषेध है। फूल बासी एवं मुरझाए हुए न हों। शिवपूजा करने के लिए सबसे पहले मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र, धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। घर के आस-पास में शिवालय न हो तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर भी पूजा की जा सकता है।
जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके महाशिवरात्रि का व्रत समाप्त करें। सूर्योदय से पहले ही उत्तर-पूर्व में पूजा आरती की तैयारी कर लेनी चाहिए। सूर्योदय के समय पुष्पांजलि और स्तुति कीर्तन के साथ महाशिव रात्रि का पूजन संपन्न होता है। उसके बाद दिन में ब्रह्मभोज भंडारा के द्वारा प्रसाद वितरण कर व्रत संपन्न होता है।