कांग्रेस में सिर्फ एक नेता ऐसा रहा, जिसने न सिर्फ मोदी की लहर को रोका, बल्कि राज्य के भीतर विपक्ष को भी बड़ी सफलता नहीं मिलने दी। जानिए कौन है वो दिग्गज राजनेता।
विज्ञापन
2 of 8
जश्न मनाते कांग्रेस कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
बात हो रही है कैप्टन अमरिंदर सिंह की, जिन्होंने पंजाब में कांग्रेस पार्टी को शानदार सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभागई। इस जीत ने उनका कद पार्टी आलाकमान के समक्ष बढ़ा दिया है। इस चुनाव में कैप्टन ही कांग्रेस के एकमात्र ऐसा नेता साबित हुए, जिन्होंने अपने राज्य में मोदी लहर को न सिर्फ रोक दिया, बल्कि राज्य के भीतर विपक्ष को भी बड़ी सफलता नहीं मिलने दी।
विज्ञापन
3 of 8
जश्न मनाते कांग्रेस कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
कैप्टन के नेतृत्व में पंजाब में कांग्रेस ने 13 में से 8 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की। लेकिन तीन अन्य कांग्रेस शासित राज्यों छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत की खराब रहा है। छत्तीसगढ़ की 11 सीटों में से कांग्रेस की झोली में 2, मध्य प्रदेश की 29 सीटों में से कांग्रेस को एक सीट मिली जबकि राजस्थान की सभी 25 सीटें भाजपा के पक्ष में गईं।
4 of 8
जश्न मनाते कांग्रेस कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
2014 के लोकसभा चुनाव में देश में शुरू हुई मोदी लहर के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह की यह कोई पहली सफलता नहीं है, बल्कि दो साल पहले उनके ही नेतृत्व में कांग्रेस ने पंजाब विधानसभा चुनाव में दो तिहाई से बहुमत हासिल कर सरकार का गठन किया था। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में भी अकाली-भाजपा गठबंधन को किनारे करते हुए कांग्रेस की झोली में 3 सीटें डाली थीं।
विज्ञापन
5 of 8
जश्न मनाते कांग्रेस कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
वीरवार को 2019 के चुनाव नतीजों ने साबित कर दिया है कि कैप्टन के नेतृत्व में पंजाब में कांग्रेस पार्टी का किला और मजबूत हुआ है। इसके साथ ही राज्य में अकाली दल और आम आदमी पार्टी भी खात्मे की तरफ बढ़े हैं। 2014 में अकाली-भाजपा गठबंधन जो 4 सीटें जीत पाया था, इस बार भी वहीं ठहर गया है जबकि आप 4 सीटों से घटकर एक पर आ गई है।
विज्ञापन
6 of 8
जश्न मनाते कांग्रेस कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय परिदृश्य में अगर कांग्रेस के मौजूदा प्रदर्शन का आकलन किया जाए तो, ऐसे समय में जब पार्टी के कई बड़े नेता, जिनमें हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित भी, न तो खुद जीत हासिल नहीं कर सके और न ही पार्टी के प्रत्याशियों को जीत दिला सके। कैप्टन अमरिंदर सिंह ही भाजपा के सामने कांग्रेस के एकमात्र कद्दावर नेता के रूप में ही उभरे हैं।
विज्ञापन
7 of 8
जश्न मनाते भाजपा कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
भले ही उन्होंने राहुल गांधी की हार को ‘हार-जीत के खेल का हिस्सा’ करार देते हुए इसे गंभीरता से लिए जाने से इंकार किया है, लेकिन यह साफ है कि नई दिल्ली में दो-तीन दिन में होने वाली कांग्रेस आलाकमान की समीक्षा बैठक में कैप्टन की दलीलों व सुझावों को पार्टी पूरी गंभीरता से लेने पर बाध्य होगी। पार्टी की अगली रणनीति में कैप्टन की भूमिका सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहेगी।
इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि पंजाब में पार्टी की जीत कैप्टन को कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित करने जा रही है। राज्य के कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने इसका सेहरा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के सिर बांधा है। 13 में से 8 सीटों की शानदार जीत के साथ अमरिंदर सिंह ने फिर सिद्ध कर दिया कि उनकी कप्तानी में पंजाब का कांग्रेस का किला और मजबूत हुआ है।