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अगर अपनाते ये तरीका तो शायद बच जाती फतेहवीर की जान, सोशल मीडिया पर हो रहा जिक्र

Thu, 13 Jun 2019 12:04 AM IST
ajay kumar सुशील कुमार, अमर उजाला, सुनाम ऊधम सिंह वाला (संगरूर)
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फतेहवीर सिंह - फोटो : अमर उजाला
दो साल के नन्हे फतेहवीर सिंह की बोर में फंसने से हुई मौत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकालने के तरीकों की चर्चा सोशल मीडिया पर चल रही है। लोग चर्चा कर रहे हैं कि इस मामले में ‘चक्क’ लगाने का तरीका कारगर साबित हो सकता था। दरअसल चक्क लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है और पुराने जमाने में इसी तरीके से कुएं खोद कर पानी की आपूर्ति की जाती थी। 
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- फोटो : अमर उजाला
दावा किया जा रहा है कि जिस बोर में फतेहवीर फंसा हुआ था, यदि उसके चारों तरफ चक्क लगाकर कुआं खोदा जाता तो हालात बदल सकते थे। एक दिन में करीब अस्सी फुट तक खुदाई करके बोर के चारों तरफ ईंटों का बांध बनाना सामान्य काम है। पड़ोस के गांव नमोल के कुछ लोग इस काम के माहिर हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
इस विधि का आसान पहलू यह था कि समांनतर बोर खोदने और पुराने बोर से मिलान करके का झंझट नहीं था क्योंकि लक्ष्य वाले बोर में ही चक्क किया जाना था। ऐसे में लोग इस विकल्प को बेहतर बता रहे हैं। दूसरी तरफ, फतेहवीर के जाने का गम लोग भुला नहीं पा रहे हैं और सिस्टम के खिलाफ खूब भड़ास निकाल रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग भावुक कविताएं लिखकर अपने जज्बात बयान कर रहे हैं जबकि कुछ लोग सियासी नेताओं की भी क्लास लगा रहे हैं। 

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फतेहवीर सिंह - फोटो : अमर उजाला
मासूम फतेहवीर सिंह की मौत के बाद लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सोमवार को विभिन्न संगठनों द्वारा संगरूर बंद के दिए आह्वान का पूर्ण असर देखने को मिला। बंद के दौरान पूरा दिन बाजार बंद रहे। इस दौरान विभिन्न संगठनों ने शहर में रोष मार्च निकाला और डीसी दफ्तर के सामने रोष धरना लगाकर प्रदेश सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। सुबह छह बजे ही विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता स्थानीय बड़ा चौक में इकट्ठा होना शुरू हो गए थे और मोटरसाइकिलों पर सवार रोष मार्च करते हुए दुकानदारों को अपनी दुकानें बंद करने की अपील कर रहे थे।
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- फोटो : अमर उजाला
डीसी दफ्तर के सामने लगाए धरने को संबोधित करते हुए धरनाकारियों ने इस घटना के लिए मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा बच्चे को बोरवेल से बाहर निकालने के लिए तकनीकी माहिरों की टीम के बजाय स्थानीय व्यक्तियों से काम करवाया गया। जिस कारण मासूम फतेहवीर को अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि फतेहवीर की मौत के लिए जिला प्रशासन जिम्मेदार है। बभी मौजूद थे।
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