जम्मू में शहीद हुए गुरसेवक के पार्थिव शरीर पर उनकी मंगेतर को रोते सबने देखा, लेकिन यहां बात एक और गुरसेवक सिंह की है। देखिए, कब और कैसे मिली शहादत?
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शहीद कमांडो गुरसेवक सिंह के घर बेटी ने जन्म लिया
- फोटो : अमर उजाला
बात हो रही है, इसी साल जनवरी में पठानकोट के आतंकी हमले में शहीद हुए अंबाला निवासी गरुड़ कमांडो गुरसेवक सिंह की। उनसे डेढ़ माह पहले ही ब्याहकर आई जसप्रीत के हाथों की मेहंदी भी नहीं उतरी थी कि आतंकी हमले में कमांडो पति शहीद हो गया।
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शहीद कमांडो गुरसेवक सिंह के घर बेटी ने जन्म लिया
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जसप्रीत के हाथों की अभी मेहंदी भी नहीं उतरी थी और सुहाग का चूड़ा भी पहना था। नियति ने ऐसा खेल खेला कि पति के शव पर चूड़े को उतारना पड़ रहा था। पड़ोस की महिलाएं जसप्रीत के हाथ से चूड़ा उतार रही थीं तो वह बेसुध हो गईं। सुहाग की चूड़ियां उतारकर गुरसेवक के शव पर रखी गईं और इसके बाद शव यात्रा रवाना हुई थी।
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शहीद कमांडो गुरसेवक सिंह के घर बेटी ने जन्म लिया
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गुरसेवक का तिरंगे में लिपटा शव देखकर सदमे में डूबी उसकी मां अमरीको और पत्नी जसप्रीत को कलेजा फट पड़ा। आंसुओं का ऐसा सैलाब बहा, जो रुक नहीं पाया। पिता सुच्चा सिंह, भाभी सुखविंद्र कौर, चचेरे भाई अमरीक सिंह अन्य परिजन शहीद के शव से लिपटकर बिलखते रहे और ग्रामीण उन्हें संभालने में जुटे रहे।
गौरतलब है कि जम्मू के पूंछ में शहीद हुए गुरसेवक पंजाब में तरनतारन के रवाणा गांव के रहने वाले थे। उनकी फरवरी में शादी होनी थी। वे 22 सिख रेजीमेंट में तैनात थे। सोमवार को उनको अंतिम विदाई देने उनकी मंगेतर भी शामिल हुईं। इसे भी इत्तेफाक ही कहा जाएगा कि सोमवार हो ही उन गुरसेवक सिंह को अंतिम विदाई दी गई थी।