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प्रशांत किशोर को मिलेगा एक रुपये वेतन, लेकिन कैबिनेट मंत्री का होगा 'रुतबा', ये सुविधाएं भी देगी कैप्टन सरकार

Mon, 01 Mar 2021 07:33 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रशांत किशोर (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बड़ा दांव खेला है। उन्होंने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को अपना प्रधान सलाहकार नियुक्त किया है। बता दें कि 2022 में पंजाब में विधानसभा चुनाव हैं। अब कांग्रेस पार्टी चुनावी तैयारियों में जुट गई है। प्रशांत किशोर को कैप्टन सरकार ने कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया है। गौरतलब है कि 2017 में हुए पंजाब विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने कैप्टन के लिए चुनावी रणनीति तैयार की थी। प्रशांत किशोर की नियुक्ति के बारे में मुख्यमंत्री कार्यालय ने विस्तृत जानकारी साझा की है। प्रशांत किशोर को टोकन मानदेय के रूप में एक रुपये वेतन मिलेगा। सचिवालय प्रशासन उन्हें एक निजी सचिव, एक निजी सहायक, एक डाटा एंट्री ऑपरेटर, एक क्लर्क और दो चपरासी उपलब्ध कराएगा।
 
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कैप्टन अमरिंदर सिंह। - फोटो : एएनआई
कैबिनेट मंत्री के सामान मिलेगा बंगला
कैप्टन सरकार प्रशांत किशोर को कैबिनेट मंत्रियों को मिलने वाला बंगला प्रदान करेगी। कैंप ऑफिस और ऑफिस में टेलीफोन की सुविधा होगी। वहीं फैक्स की सुविधा भी मिलेगी। मोबाइल सेवा असीमित रहेगी। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर उन्हें परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराएंगे। ट्रेन में यह सुविधा एक्जीक्यूटिव क्लास की होगी तो वहीं हवाई यात्रा में प्रशांत किशोर को कैबिनेट मंत्री के समान सुविधा मिलेगी। हॉस्पिटैलिटी खर्च के रूप में हर माह पांच हजार रुपये मिलेंगे। प्रशांत को कैबिनेट मंत्री के बराबर स्वास्थ्य सुविधाएं भी मिलेंगी।
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प्रशांत किशोर (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
बता दें कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह कई बार प्रशांत किशोर की तारीफ कर चुके हैं। कांग्रेस ने 2017 में किशोर को पांच राज्यों की चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। इसमें पंजाब एकमात्र ऐसा राज्य रहा जहां पार्टी बहुमत प्राप्त करने में सफल हुई। जबकि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। 

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प्रशांत किशोर (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने प्रशांत किशोर की बनाई नीति अपनाकर ही सत्ता हासिल की थी। इसके बाद किशोर ने बिहार में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को अपनी सेवाएं दीं। प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार, लालू प्रसाद और कांग्रेस को मिलाकर बिहार में गठबंधन की नई सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।
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प्रशांत किशोर (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
बदले में जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए। फिर जदयू में खटपट बढ़ी तो किशोर ने नीतीश से अपनी राह अलग कर ली थी। 34 साल की उम्र में अफ्रीका से संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की नौकरी छोड़कर किशोर 2011 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम से जुड़े थे। जिससे राजनीति में ब्रांडिंग का दौर शुरू हो गया। 
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