किसान आंदोलन
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केंद्र से बार बार बातचीत असफल रही तो किसानों ने अपनी दिनचर्या तय कर ली। दिन की शुरुआत शबद कीर्तन से होती फिर चाय नाश्ते के बाद धरना दिया जाता। लंगर में सेवा करने के बाद किसान ताश खेलते, हुक्का गुड़गुड़ाते और फिर शाम के खाने की तैयारी हो जाती। रात में सेहत फिट रखने के लिए काजू-बादाम वाला दूध भी जरूर पिया जाता था।