लाहौर की कोट लखपत जेल में दम तोड़ने वाले कैदी किरपाल सिंह का शव आज भारत पहुंचा तो पोस्टमार्टम में पाकिस्तान की पोल भी खुल गई।
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कैदी किरपाल का शव भारत पहुंचा, पोस्टमार्टम में खुली पाक की पोल
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किरपाल सिंह का शव भारत पहुंचा
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार दोपहर को शव मंगलवार को वाघा बॉर्डर पर पहुंचा। यहां पाक हाई अथॉरिटी ने शव को बीएसएफ अधिकारियों के हवाले कर दिया। किरपाल के परिवार ने हत्या की आशंका जताई है। उनका कहना है कि शव के चेहरे और शरीर पर चोट के निशान हैं। देर शाम तक अमृतसर के गुरु रामदास अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम हुआ। पोस्टमार्टम में सामने आया कि कृपाल के शरीर में न तो दिल और न ही लीवर है। बिसरे की केमिकल जांच के लिए पैथोलॉजी लैबोरेटरी खरड़ भेजा गया है।
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गौरतलब है कि गत 11 अप्रैल को लाहौर की कोट लखपत जेल में किरपाल सिंह की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। परिजनों ने केंद्र सरकार से किरपाल का शव भारत लाने का अनुरोध किया था। इस पर विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान से बातचीत की और मंगलवार दोपहर करीब 2:35 बजे पाक हाई अथॉरिटी के अधिकारी किरपाल सिंह का शव लेकर वाघा बॉर्डर पहुंचे। यहां प्रदेश सरकार के मंत्री गुलजार सिंह रानीके और अमृतसर डीसी वरुण रुजम की मौजूदगी में किरपाल सिंह शव बीएसएफ के हवाले किया
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तो जिंदा लौटते किरपाल सिंह: किरपाल सिंह के परिजनों का कहना है कि केंद्र सरकार ने 11 अप्रैल से पहले हमारी बात सुनी होती तो आज किरपाल सिंह जिंदा लौटते। किरपाल सिंह की बहन चरणजीत कौर और भतीजे अश्वनी ने बताया कि वे सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर को साथ लेकर दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और सुषमा स्वराज से मिले थे। केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के साथ बात करने में देरी कर दी। इसी बीच 11 अप्रैल को किरपाल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
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कथित पत्नी ने शव पर दावा जताया: केंद्र सरकार ने अभी तक किरपाल सिंह के परिजनों को सहायता राशि घोषित नहीं की है लेकिन सरकारी पैसे पर किरपाल सिंह के करीबी अपना हक जताने लगे हैं। शादी के छह माह बाद किरपाल सिंह को छोड़कर जाने वाली गुरदासपुर के गांव ओजला गांव की परमजीत कौर ने सोमवार को शव पर अपना दावा जताया। पत्रकारों से बात करते हुए परमजीत कौर ने शव उसे सौंपे जाने की मांग की है।
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उधर गांव के लोगों और शिव सेना के अध्यक्ष अमृत अग्रवाल ने मांग की है कि किरपाल सिंह के परिजनों को मिलने वाला फंड गांव के विकास पर खर्च किया जाए। इनका कहना है कि किरपाल शादीशुदा नहीं था न ही उसका कोई बच्चा है। गांवों वालों ने बताया है कि किरपाल सिंह 7 भाई बहन हैं। इनमें से दो भाइयों की पहले मौत हो चुकी है। यह भी पता चला है की किरपाल सिंह की पाकिस्तान में गिरफ्तारी की खबर सुनने के 6 माह बाद ही माता-पिता सदमे से चल बसे थे।
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गोद लिया बेटा सवालों के घेरे में: गांव के एक व्यक्ति ने अपनी पहचान छुपाने की शर्त पर गोद लिए कथित बेटे अश्वनी को सवालों के घेरे में लिया। उसके मुताबिक 1988 में जब किरपाल की शादी हुई, सब ठीक था। छह महीने बाद किरपाल अचानक गायब हो गया तो उसकी पत्नी को ससुराल छोड़ने पर मजबूर किया गया। गांव के ही एक पुलिस अधिकारी ने किरपाल के मां बाप की पेंशन लगवा दी, जो अश्वनी का परिवार लेता रहा। किरपाल के मां-बाप की मौत के बाद पेंशन बंद हो गई तो फिर उसी पुलिस वाले ने अश्वनी को गोद लेने का प्रमाणपत्र बनवाकर पेंशन फिर से शुरू करा दी।
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बरी होने के बावजूद जेल में रखा: बताया जाता है कि किरपाल सिंह 1992 में शराब के नशे में सीमा पार करने पर पाकिस्तानी फोर्स के हाथ लग गया था। पाकिस्तान ने किरपाल सिंह को बम धमाकों के केस में फांसी की सजा दे दी थी। बाद में केस की सच्चाई सामने आने पर उसे बरी कर दिया था। इसके बाद भी उसे लाहौर की कोट लखपत जेल में कैद रखा गया।