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अकेली महिलाएं नहीं, यहां खूंखार जानवर भी रखते हैं उपवास

Sat, 31 Oct 2015 08:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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करवाचौथ पर महिलाएं तो व्रत रखती ही हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा चिड़ियाघर है, जहां खूंखार जानवर भी उपवास रखते हैं। देखिए, पूरा मामला।
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अकेली महिलाएं नहीं, यहां खूंखार जानवर भी रखते हैं उपवास

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ऐसा होता है चंडीगढ़-पटियाला रोड पर स्थित छतबीड़ चिड़ियाघर में। यहां शेर हो या टाइगर या फिर लेपर्ड, फ्राइडे है तो सबका उपवास। कारण सीधे उनके स्वास्थ्य से जुड़ा है। छह दिन सुबह शाम डाइट के बाद शुक्रवार की डाइटिंग उनको फिट कर देती है।
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ऐसा नहीं है कि शुक्रवार को भोजन न मिलने से वह नाराज होते हों। इनका व्यवहार एकदम सामान्य रहता है। यहां प्रतिदिन करीब दो सौ किलो मांस की सप्लाई आती है। वह शेर, टाइगर, लेपर्ड और जैकाल के संग लकड़बग्घे को खिलाया जाता है।

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छतबीड़ के एक अधिकारी ने बताया जंगल में स्वछंद विचरण करने वाले जानवर भी हरेक सप्ताह में दो से तीन दिन तक भूखा रहता है। छतबीड़ के जानवरों में भी ऐसा ही है। अकेले शेर और टाइगर के लिए 10-10 किलो मांस आता है।
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छतबीड़ चिड़ियाघर में सहारनपुर से रोजाना मांस की सप्लाई की जाती है। शुक्रवार को यहां मांस नहीं आता। जिसका सीधा कारण जानवरों का पेट साफ करना रहता है। कई जानवर ऐसे हैं जो दूसरे दिन भी भोजन नहीं करते।
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जिस जानवर का मांस छतबीड़ के जानवरों के लिए आता है उसकी एंटी मार्टम रिपोर्ट भी साथ में संलग्न की जाती है। एंटी मार्टम रिपोर्ट यानी जिस जानवर का मांस है वह जानवर मरने के पहले किस हालत में था, उसका स्वास्थ्य कैसा था।
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सहारनपुर से आने वाले मांस की अस्पताल में चेकिंग की जाती है। एक जू कीपर के अनुसार उनका जानवर कोई हड्डी नहीं खाता या फिर खाने से मुंह फेरता है तो उस स्थिति में दो बातों पर ध्यान दिया जाता है, एक यह कि जानवर बीमार तो नहीं या फिर मांस में गड़बड़ी तो नहीं। खाने के बाद मांस जानवर कैसा स्टूल पास करता है उसकी रिपोर्ट भी बनाकर भेजना अनिवार्य है।
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