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अच्छी खबर : नैरो गेज ट्रैक पर 30 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ेगी कालका-शिमला टॉय ट्रेन, आखिरी ट्रायल भी पूरा  

Wed, 17 Mar 2021 12:36 PM IST
निवेदिता वर्मा दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर (पंजाब)
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कालका शिमला टॉय ट्रेन - फोटो : फाइल फोटो
कालका-शिमला यूनेस्को हेरिटेज रेलवे नैरो गेज ट्रैक पर टॉय ट्रेन अब 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेगी। ट्रेन की स्पीड बढ़ाने के लिए आठ मोडिफाइड कोच के साथ फाइनल ट्रायल हो चुका है। बाकी के कोच तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जो दो माह में तैयार हो जाएंगे। रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) लखनऊ की टीम इस नैरो गेज ट्रैक पर साढ़े 22 से 30 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन दौड़ाने पर विचार कर रही है। अभी आरडीएसओ को फाइनल रिपोर्ट भी देनी है। वहीं, रेलवे इंजीनियरिंग विंग के अधिकारियों की मानें तो सभी ट्रेनों में डेंपर्स की मदद से डिब्बों और व्हील के बीच दोनों तरफ संतुलन बनाया जाएगा। जिससे टॉय ट्रेन की रफ्तार बढ़ाने पर नैरो गेज ट्रैक पर दौड़ती ट्रेन डिरेल न हो सके। मौजूदा समय में कालका से शिमला की 96 किलोमीटर की दूरी ट्रेन 23 केएमपीएच की रफ्तार से औसतन 5 घंटे में तय करती है। लेकिन अब इसकी स्पीड 30 किमी प्रति घंटा होने पर यह दूरी करीब 4 घंटे में तय हो सकेगी।
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टॉय ट्रेन - फोटो : फाइल फोटो
योजना थी 40 केएमपीएच रफ्तार की, पर 48 डिग्री के 600 कर्व पर संभव नहीं
यूनेस्को की ओर से विश्व धरोहर घोषित कालका-शिमला नैरो गेज ट्रैक पर पहले 40 केएमपीएच रफ्तार से टॉय ट्रैन दौड़ाने की योजना थी। लेकिन इस ट्रैक पर 48 डिग्री के करीब 600 कर्व हैं। ऐसी स्थिति में 35 केएमपीएच से अधिक रफ्तार से 7 डिब्बों वाली टॉय ट्रेन को दौड़ाने का मतलब अक्तूबर, 2015 डिरेल वाले हादसे को दोहराना है। 2015 में टॉय ट्रेन की स्पीड महज 3 से 5 किलोमीटर प्रति घंटा बढ़ाने की कोशिश की गई थी। उस समय सितंबर और अक्तूबर में दो बार ट्रैक से टॉय ट्रेन डिरेल हो गई थी। सितंबर के हादसे में तीन ब्रिटिश महिलाओं की मौत हो गई थी, जबकि 20 लोग घायल हुए थे। 
 
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कालका शिमला टॉय ट्रेन - फोटो : फाइल फोटो
एक बार फिर केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल के आदेशों के बाद कालका-शिमला ट्रैक पर लखनऊ से आरडीएसओ की टीम ने सर्वे किया है। टीम ने नैरो गेज डीजल शेड लोको 706 (इंजन) में स्पीड 25 से बढ़ाकर 37 केएमपीएच मापने के उपकरण फिट किए। जैसे ही इंजन की स्पीड 37 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पर पहुंची, इंजन अप डाउन जर्क करने लगा। इसके बाद इंजन की स्पीड का अधिकतम निर्धारित मानक 35 रखा गया है। इस स्पीड पर इंजन सही रफ्तार पर चल रहे थे, लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर इसकी रफ्तार 5 केएमपीएच और कम कर दी गई है। उसके बाद 30 केएमपीएच के मानक तय कर दिए गए। इस पर फाइनल फैसला जल्द ले लिया जाएगा।
 

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कालका शिमला टॉय ट्रेन - फोटो : फाइल फोटो
30 केएमपीएच से ज्यादा रफ्तार के लिए, खत्म करने होंगे तीखे मोड़
रेलवे विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक ट्रेन की 30 केएमपीएच रफ्तार बढ़ाने के लिए ढाई फुट चौड़े नैरो गेज ट्रैक पर तीखे मोड़ खत्म करने होंगे। लेकिन हेरिटेज सेक्शन होने के कारण इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता तो ऐसे में नई ब्रॉडगेज की चौड़ी रेल पटरी बिछाई जाए या फिर रेल कार की भांति एक या दो डिब्बों की ट्रेन चलाई जाए, तभी 35 केएमपीएच की रफ्तार से ट्रेन चलाना संभव होगा। क्योंकि सिर्फ कालका से सोलन तक 393 कर्व हैं। इनमें 36, 45, 48 डिग्री के कर्व भी शामिल हैं, जहां स्पीड बढ़ाना संभव नहीं है। कालका-शिमला मार्ग पर तारादेवी से जगोत के बीच कम डिग्री के कर्व हैं। यहां कुछ जगह ट्रैक स्ट्रेट भी है। इस ट्रैक पर टॉय ट्रेन की स्पीड कुछ बढ़ाई जा सकती है। आरडीएसओ की टीम ने सबसे पहले यहां परीक्षण किया था। इस मार्ग पर 22 से 37 केएमपीएच की रफ्तार से इंजन दौड़ाया गया, लेकिन 37 पर जाते ही इंजन अप डाउन जर्क करने लगा था।
 
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कालका शिमला टॉय ट्रेन - फोटो : फाइल फोटो
रोजाना करीब डेढ़ हजार यात्री करते हैं सफर
कालका-शिमला रेलमार्ग में 103 सुरंगें और 869 पुल बने हुए हैं। इस मार्ग पर 919 घुमाव आते हैं, जिनमें से सबसे तीखे मोड़ पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर घूमती है। इस रेलमार्ग पर सामान्य सीजन में करीब डेढ़ हजार यात्री टॉय ट्रेन से सफर करते हैं, जबकि पीक सीजन में यह आंकड़ा दोगुना हो जाता है। नॉर्दर्न रेलवे के जीएम आशुतोष गंगाल ने बताया कि कालका-शिमला रेलमार्ग पर चलने वाली टॉय ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने पर काम चल रहा है। आरडीएसओ की टीम लगातार इस पर काम कर रही है, लेकिन 40 केएमपीएच की रफ्तार से इस मार्ग पर टॉय ट्रेन चलाना संभव नहीं है। उसका कोई विकल्प तलाश रहे हैं। रेल मंत्री पीयूष गोयल का भी इस पर काफी फोकस है।
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