पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लेडी डाक्टर की मौत का अधूरा सच सामने आया है, कुछ और सवाल बाकी हैं, जो जांच को उलझा रहे हैं। देखिए, यहां।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला लेडी डाक्टर की मौत का अधूरा सच
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला है कि मृतका के बाजू पर नीले रंग का निशान था। वहीं, मुंह से खून निकला हुआ था। उसके होंठ भी नीले पड़ गए थे। पोस्टमार्टम करने वाली टीम ने जांच के लिए विसरा पटियाला और खरड़ लैब भेजा है। जब डॉक्टरों से यह पूछा गया कि क्या यह ड्रग ओवर डोज का मामला है तो उन्होंने इस पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
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दूसरी तरफ पुलिस ने भी अपनी जांच शुरू कर दी है। सूत्रों से पता चला है कि खरड़ के जिस क्लीनिक में यशुमति काम करती थीं, वहां के डॉक्टर को भी राउंडअप कर पुलिस ने पूछताछ की है। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव को लेकर मंडी रवाना हो गए। पुलिस को यशुमति के कमरे से एक दवा से भरा इंजेक्शन और दो खाली सिरिंज मिली है। इसके अलावा कमरे से शराब की एक खाली बोतल भी बरामद हुई है। पुलिस ने सभी सामान जांच के लिए सीएफएल लैब भेज दिया है।
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मृतका की मां भावना ने बताया कि बेटी उन्हें फोन पर बताती थी कि मम्मी वह काफी बढ़िया तरीके से काम कर रही है। मरीज उससे इलाज करवाने में रुचि दिखाते हैं। इससे उनके स्टाफ के कई मेंबरों को जलन होती हैं। घरवालों ने बताया कि यशुमति आखिरी बार अप्रैल के नवरात्रों में घर गई थी। वह उस समय काफी खुश थी। उस दौरान उसने कुछ समय घर पर भी बताया था। उसे देखकर लगता ही नहीं था कि उसे किसी भी प्रकार की कोई टेंशन है।
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सूत्रों से पता चला है कि यशुमति सोमवार रात पौने 12 बजे तक व्हाट्सअप पर सक्रिय थीं। उसका व्हाट्सअप पौने बारह बजे तक एक्टिव था। इसके बाद व्हाटसअप बंद हो गया था। पुलिस ने यशुमति का फोन अपने कब्जे में ले लिया है। उसकी फोन कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। वहीं, मृतका की मां ने कहा कि उनकी बेटी बड़ी हिम्मत वाली थी। वह कभी भी आत्महत्या नहीं कर सकती थी। उनकी बेटी की हत्या की गई। इसके बावजूद भी पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। न ही मौके पर फोरेंसिक की टीम बुलाई और न ही फिंगर प्रिंट की टीम ने अपने सैंपल लिए है।
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जैसे ही परिजनों ने बेटी का शव देखा तो उनकी हालत खराब हो गई। मां और पिता का रो-रो कर बुरा हाल था। उनके मुंह से यहीं निकल रहा थ कि हमारी डॉक्टर चली गई। पिता ने बताया कि उन्होंने उसे डॉक्टर बनाने में अपनी जान लगा दी थी। भावना ने बताया कि बेटी जब भी बाहर से कमरे में आती थी, तो पहले कमरे की कुंडी लगाती थी। सोमवार को ऐसा नहीं था। अगर उसकी सहेली कहती है कि कमरा अंदर से बंद था तो जब उन्होंने दरवाजा खोला तो कुंडी टूटी क्यों नहीं। उन्होंने बताया कि सारे सीन को देखकर ऐसा लगता है कि उनकी बेटी ही हत्या कर चुपके से कमरे में छोड़ गए थे।
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फेज-6 स्थित सिविल अस्पताल की मोर्चरी के बाहर बैठे परिजनों ने बताया कि बेटी के मौत की सूचना मिलते ही वह मोहाली के लिए रवाना हो गए थे। दोपहर तीन बजे जब वह यहां पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें उनकी बेटी का चेहरा तक नहीं देखने दिया। इतना ही नहीं उसके कमरे को ताला लगाकर चाबी भी अपने पास रख ली। वे पूरी रात खुले सड़क पर भटकते रहे।
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परिजनों का कहना कि पुलिस ने मंगलवार सुबह उन्हें कमरे की चाबी दी। उन्होंने कहा कि अब भगवान से एक ही प्रार्थना है कि बेटी के कातिल पकड़े जाएं। उनकी बेटी को इंसाफ मिले।
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मृतका की मां भावना व पिता मोरध्वज ने बताया कि उनकी बेटी का सपना एमबीबीएस करना था, लेकिन उनके पास इतना पैसा नहीं था। इसके चलते उन्होंने उसे बीएएमएस करवाया था। घरवालों ने बताया कि जब भी वह घर पर बात करती थी, तो हमेशा कहती थी कि वह अच्छा काम कर रही है। मां ने बताया कि उन्होंने कभी उससे नहीं पूछा कि उसकी सैलरी कितनी है। लेकिन, कुछ समय पहले उसकी डिग्री आई थी, तो उसने फोन कर बताया था कि उसकी सैलरी बढ़ने वाली है।