देश का एक ओर सपना पूरा होने जा रहा है। सबके सामने देश की पहली हवाई ट्रेन आ रही है। देखें भारतीय रेलवे का नया चमत्कार
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200 किमी स्पीड वाली देश की पहली ‘हवाई ट्रेन’ तेजस अब भारतीय रेलवे के बेड़े में शुमार हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट हकीकत में ट्रैक पर उतर चुका है। तेजस कोच का पहला रैक वीरवार दोपहर को रेल कोच फैक्टरी से मुंबई के लिए रवाना हो गया है। पहले रैक में 19 कोच शामिल हैं।
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दिल्ली में रेल मंत्री सुरेश प्रभु रेल कोच फैक्टरी की काबिलियत को परखेंगे और उसके बाद ट्रेन को सेंट्रल रेलवे मुंबई के लिए भेज दिया जाएगा। उम्मीद है कि बहुत जल्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ट्रेन को मुंबई-गोवा रेल ट्रैक पर जनता को समर्पित करेंगे।
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तेजस में कुल 19 कोच हैं। जिनमें 16 एग्जीक्यूटिव क्लास चेयर कार, चेयर कार और पावर कार शामिल हैं। जबकि तीन कोच एक्स्ट्रा भेजे गए हैं ताकि आपात स्थिति में किसी कोच में खराबी होने पर इन्हें इस्तेमाल किया जा सके। मुंबई में बहुत जल्द पीएम नरेंद्र मोदी इस तेज गति वाली देश की पहली ट्रेन को मुंबई-गोवा रेल ट्रैक पर जनता को समर्पित करेंगे। इस कोच के ट्रायल रन हो चुके हैं, ऐसे में अब फाइनल रन होगा।
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सुविधाओं के लिहाज से तेजस ट्रेन के अंदर यात्रियों को हवाई जहाज का आभास होगा। जितनी तेज गति से ट्रेन दौड़ेगी, उतनी ही सहजता से अंदर बैठे यात्रियों को डिजीटाइजेशन के माध्यम से स्पीड, रेलवे स्टेशन और अन्य बाहर की चीजों का पता चलता रहेगा। विमान की तरह ई-लेदर सीट, आर्म्स और लेग रेस्ट के लिए कुशन सफर को और भी आरामदायक बनाएंगे। हवाई जहाज की तरह कॉल बेल बजाते ही ट्रेन होस्टेस हाजिर होंगी। मनोरंजन के लिए एलईडी का प्रबंध है, वहीं टचलेस वाटर और सोप डिस्पेंसर सफर को और भी खुशनुमा बनाएंगे।
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आराम के मामले में ट्रेन के अंदर का माहौल किसी होटल से कम नहीं है। गैजेट्स के लिए यूएसबी पोर्ट का भी प्रावधान है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि अत्याधुनिक तकनीकों की मौजूदगी के बावजूद इसमें पर्यावरण और स्वच्छता का प्राथमिक तौर पर ध्यान रखा गया है। इसके लिए बायो वैक्यूम टाइलेट्स और जल संरक्षण के मद्देनजर ऐसा सिस्टम लगाया गया है, जिसमें ज्यादा से .5 से 1.5 लीटर पानी ही इस्तेमाल होगा। इससे जल के दुरुपयोग की गुंजाइश को बेहद कम कर दिया गया है।
इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए आगे-पीछे लगी पावर कार में निर्धारित सर्वर की जगह छोड़ी गई है, वहीं सूप, चाय और कॉफी वेंडर लगाने के लिए भी अनिवार्य स्पेस का प्रावधान है। एक कोच में आगे-पीछे लगे दो सीसीटीवी सुरक्षा को पुख्ता बनाएंगे। मेट्रो की तर्ज वाले हाइड्रोलिक डोर इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं। सबसे अहम आग लगने की सूरत में ऐसे सेंसर स्थापित किए गए है कि आग के धुएं की मात्रा के अनुसार सेंसर की आवाज ज्यादा-कम होगी। मामूली धुआं होने पर पावर कार में मौजूद गार्ड को तुरंत इसकी सूचना मिलेगी और वह आग को बुझाने को तुरंत पहुंचेगा। अगर आग ज्यादा हुई तो ट्रेन रुक जाएगी।