आतंकियों से लड़ते शहीद हुए जवान विक्रमजीत का चेहरा देखकर गर्भवती पत्नी बेहोश हो गई। मां का कलेजा भी मुंह को आ गया, लेकिन खुद संभलते हुए बहू को संभाला। अंतिम संस्कार के दौरान पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगे।
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विक्रमजीत सिंह का अंतिम संस्कार
दुश्मनों से बब्बर शेर की तरह लड़ा और सीने पर गोलियां खाते हुए देश पर कुर्बान हो गया विक्रमजीत सिंह (26 वर्ष)। हरियाणा के अंबाला जिले के गांव तेपला निवासी विक्रमजीत सिंह मंगलवार सुबह जम्मू कश्मीर के गुरेज सेक्टर में शहीद हो गए। वीरवार सुबह गांव में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मां और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था।
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विक्रमजीत सिंह का अंतिम संस्कार
जवान विक्रमजीत सिंह उर्फ सोनी को हजारों लोगों के जनसैलाब के बीच अंतिम विदाई दी गई। पैतृक गांव तेपला में देश के इस सपूत का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार दिया गया। चिता को मुखाग्नि पिता बलजीत सिंह ने दी तो सेना के जवानों ने शस्त्र उल्टे करके श्रद्धांजलि दी।
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विक्रमजीत सिंह का अंतिम संस्कार
विक्रमजीत सिंह ने 12वीं तक पढ़ाई के बाद 2015 में रोहतक में भर्ती परीक्षा पास कर सेना जॉइन की। सबसे पहले पंजाब के फिरोजपुर में पोस्टिंग मिली। 2016 में श्रीनगर में ड्यूटी हो गई। छोटे भाई मोनू ने भी सेना जॉइन की है। उसकी ड्यूटी गुवाहाटी में है। विक्रमजीत के दादा सेना में थे। उन्हीं से प्रेरणा लेकर दोनों भाई देश सेवा के लिए सेना में पहुंचे।
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विक्रमजीत सिंह का अंतिम संस्कार
विक्रमजीत की शादी 15 जनवरी 2018 को यमुनानगर के गांव पीबनी की रहने वाली हरप्रीत से हुई थी। हरप्रीत साढ़े 3 महीने की गर्भवती है। विक्रमजीत शादी के बाद छुट्टियां खत्म कर 24 मार्च को ड्यूटी पर लौटे थे। सोमवार को ही विक्रमजीत की हरप्रीत से फोन पर एक घंटे तक बात हुई, लेकिन मंगलवार सुबह 8 बजे शहादत की खबर आ गई।
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विक्रमजीत सिंह का अंतिम संस्कार
मेरे सोनी को मुझसे मिला दो
विक्रमजीत का शव जैसे ही गांव तेपला में पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंच गए। छह माह की गर्भवती पत्नी हरप्रीत कौर, मां कमलेश कौर और भाई मोनू सिंह का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। उन्हें देखकर सभी के आंखों में आंसू झलक पड़े। पत्नी बार-बार यही कह रही थी कि मेरे सोनी को मुझसे मिला दो।
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पाकिस्तान मुर्दाबाद के लगे नारे
शहीद का शव जैसे ही घर से अंतिम संस्कार के लिए निकला तो ग्रामीणों ने जब तक सूरज चांद रहेगा सोनी तेरा नाम रहेगा और भारत मां की जय के नारे लगाए। इस दौरान लोगों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के भी नारे लगाए गए। हर किसी की जुबान पर पाकिस्तान की निंदा थी।
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विक्रमजीत सिंह का अंतिम संस्कार
ऐसे हुई आतंकियों से टक्कर
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सेना की 36 आरआर और 9 ग्रेनेडियर ने मिलकर एलओसी के नाने सेक्टर और बकतूर में सर्च अभियान चलाया। इस दौरान आतंकियों की घुसपैठ को रोकने के लिए की गई गोलीबारी में दो उग्रवादियों को मारने में सफलता मिली, जबकि सेना के चार जवान शहीद हो गए।
गांव से दो जवान पहले हो चुके हैं शहीद, एक की ड्यूटी के दौरान हुई थी मौत
तेपला गांव की माटी में सैनिक बनने का जज्बा है। करीब 250 घरों में सेना के जवान भर्ती हैं। इससे पहले भी गांव के ही दो जवान कारगिल युद्ध के दौरान मेजर गुरप्रीत सिंह और वर्ष 2005 में जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए हरजिंदर सिंह शहीद हो गए थे। वहीं अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान पहाड़ से पैर फिसलने पर विनोद सिंह की मौत हो गई थी।