जम्मू कश्मीर के पुंछ में पाकिस्तान की गोलाबारी में शहीद हुए बहादुर सैनिक गुरसेवक सिंह की 13 फरवरी को शादी थी। जानिए, उनके बारे में सबकुछ।
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शहीद गुरसेवक सिंह
गुरसेवक सिंह 2013 में सेना में भर्ती हुए थे। वो सिख रेजीमेंट के सिपाही थे। देश के लिए मर मिटने के जुनून के साथ गुरसेवक ने सेना की वर्दी पहनी थी और वाकई वो देश के लिए मर मिटे। पाकिस्तान की तरफ से हुई फायरिंग के दौरान गुरसेवक सिंह को भी गोली लगी और वो देश के लिए शहीद हो गए।
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शहीद गुरसेवक सिंह
पिता बलविंदर सिंह भले ही पुत्र की शहादत की खबर के बाद आंखों से आंसू बहा रहा था, लेकिन बार-बार गर्व से ये कह रहा था कि देश-कौम दे लेखे लग्ग गिया ऐ अज्ज मेरा गुरसेवक। 25 मार्च 2013 को सिख रेजिमेंट में भर्ती हुआ 23 वर्षीय गुरसेवक सिंह दो बहनों का बड़ा भाई था।
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शहीद गुरसेवक सिंह
गुरसेवक तरनतारन जिले के गांव वराणा के थे। पिता बलविंदर सिंह ने कहा कि उन्हें जवान बेटे के जाने का दुख तो है, लेकिन गर्व भी है कि बेटा देश के लिए कुर्बान हुआ। शहीद गुरसेवक के चचेरे भाई जोरावर सिंह ने कहा कि वह आर्मी ज्वाइन कर शहीद भाई गुरसेवक सिंह की मौत का बदला आतंकियों घुसपैठियों को मार कर लेगा।
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शहीद गुरसेवक सिंह
जुलाई माह में तीन माह की छुट्टी काटने जब गुरसेवक सिंह अपने घर आया तो गांव नागोके के पूर्व सैनिक दलबीर सिंह की बेटी के साथ उसकी मंगनी हुई। 12 फरवरी 2017 को विवाहित जीवन में बंधने जा रहा गुरसेवक सिंह जम्मू-कश्मीर स्थित लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) की कृष्णाघाटी पर तैनात था।
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शहीद गुरसेवक सिंह
22 सिख रेजिमेंट के सिपाही गुरसेवक सिंह को पाकिस्तान की ओर से हुई गोलाबारी के दौरान शहादत देने की खबर जब गांव पहुंची तो परिवार में मातम पसर गया। मां बलजीत कौर, बहनें रमनजीत कौर, कंवलजीत कौर का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं शहीद गुरसेवक सिंह का बड़ा भाई जसबीर सिंह गहरे सदमे में था।
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शहीद गुरसेवक सिंह
राखी पर गुरसेवक बहनों से राखी बंधवाने आए थे और वादा करके लौटे थे कि अगली बार आएंगे तो शादी करेंगे, लेकिन ये नहीं सोचा था कि सेहरा बंध नहीं पाएगा और बेटा तिरंगे में लिपटकर आएगा। तीन दिन पहले ही गुरसेवक ने बहनों को फोन किया था, लेकिन ये नहीं सोचा था कि वो आखिरी बात होगी।
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शहीद गुरसेवक सिंह
मां बलजीत कौर जहां बेटे का शव देख-देखकर बेसुध हो रही थीं, वहां बहनों रमनजीत और कवलजीत का भी बुरा हाल है। हर किसी की आंख नम है। सिर्फ घर ही नहीं तरनतारण जिले का वराना लालपुर गांव गम में डूबा है। नाते रिश्तेदारों के अलावा दोस्तों की आंखें भी नम हैं, सबको फक्र है कि गुरसेवक ने देश के लिए कुर्बानी दी।
गांव वराणा की आबादी दो हजार के करीब है। इस गांव के हर घर से एक सदस्य फौज, बीएसएफ और अर्द्ध सैनिक बल में तैनात है। शहीद गुरसेवक सिंह के साथ फौज में भर्ती हुए उसके दोस्त गुरविंदर सिंह ने बताया कि इस गांव में 200 के करीब युवा सेना, बीएसएफ और अर्द्ध सैनिक बलों में तैनात होकर देश की सेवा कर रहे है।