मां ने बेटे का माथा चूमकर उसे अंतिम विदाई दी और ऐसी बात कह दी, सुनकर पिता का कलेजा फट गया। बहन का रो-रोकर बुरा हाल रहा, तस्वीरें।
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शहीद कुलदीप सिंह का अंतिम संस्कार
मैं तो सेहरा बांधने की तैयारी कर रही थी, बहू और पोते-पोती का मुंह देखना चाहती थी। तू तो बेसहारा छोड़कर चला गया। मेरे सारे अरमान अधूरे ही रह गए, शहीद कुलदीप सिंह का शव तिरंगे में लिपट कर आया तो मां हरदीप कौर बदहवास हो गई। वहीं पिता बलदेव सिंह, बहन बेअंत कौर और भाई हरप्रीत सिंह का रो-रोकर बुरा हाल था।
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शहीद कुलदीप सिंह का अंतिम संस्कार
श्रीनगर के अनंतनाग के बारामूला सेक्टर में सर्च ऑपरेशन के दौरान हुए हादसे में गांव पित्थो निवासी जवान कुलदीप सिंह शहीद हो गए। मंगलवार को सैनिक सम्मान के साथ कुलदीप सिंह अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर सेना के सूबेदार सुखदेव सिंह के नेतृत्व में शहीद कुलदीप सिंह को 21 बंदूकों की सलामी दी गई।
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शहीद कुलदीप सिंह का अंतिम संस्कार
शहीद के पिता बलदेव सिंह ने बताया कि कुलदीप तकरीबन तीन साल पहले पढ़ाई पूरी करने के बाद फौज में भर्ती हुआ था। वह तीन बहन भाइयों में से सबसे छोटा था और उसका अभी तक उसकी शादी भी नहीं हुई थी। मेहनत मजदूरी करके उसको पढ़ाया था और परिवार की आर्थिक हालात सुधारने और देशसेवा करने के लिए फौज में भेजा था।
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शहीद कुलदीप सिंह का अंतिम संस्कार
पिता बलदेव सिंह ने बताया कि लेकिन उनका बेटा उन्हें इतनी जल्दी छोड़ जाएगा, पता नहीं था। हमें उस पर गर्व है कि उसने देश की सेवा करते हुए जान दी, लेकिन परिवार का सहारा तो वही था। शहीद कुलदीप सिंह के अंतिम संस्कार में तहसीलदार राकेश कुमार, एसएचओ सदर रामपुरा भूपिंदर सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।
सूबेदार सुखदेव सिंह ने बताया कि कुलदीप सिंह श्रीनगर में तैनात था। मंगलवार को अनंतनाग के बारामूला सेक्टर में गश्त के दौरान हादसा हो गया। इस हादसे में कुलदीप सिंह और उसके नौ साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को आर्मी कैंप के अस्पताल में ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान कुलदीप सिंह की मौत हो गई।