कारगिल के एक परमवीर ने सुनाया 4 जुलाई की शाम से लेकर 5 जुलाई की सुबह तक का वो घटनाक्रम, जिसे सुनकर भारत मां के वीर सपूतों को सेल्यूट करेंगे आप।
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कारगिल युद्ध
कारगिल युद्ध को करीब 19 बरस बीत चुके है।, लेकिन इस युद्ध के पराक्रम की गाथाएं आज भी सेना के ताकत का परिचय देती हैं। ऐसा ही एक पराक्रम कारगिल युद्ध के दौरान एलओसी से सटे ‘फ्लैट टॉप’ प्वाइंट पर देखने को मिली। पूरी प्लाटून गोलियों से छलनी थी, दो जवान शहीद हो चुके थे, फिर घायल जवानों ने प्वाइंट तब तक नहीं छोड़ा, जब जीत हासिल नहीं हुई।
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कारगिल के शस्त्र
परमवीर चक्र पाने वाले सूबेदार संजय कुमार (एलओसी फिल्म में सुनील शेट्टी ने निभाई है भूमिका) ने ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में बताया कि यही साइलेंट मूवमेंट रणनीति ‘फ्लैट टॉप’ समेत कई प्वाइंटस पर कामयाब साबित हुई थी। संजय कुमार अपने 11 जवानों की टीम के साथ 4 जुलाई 1999 शाम को आगे बढ़ रहे थे। दुश्मन दिखाई नहीं दे रहा था। अचानक दुश्मन ने जबरदस्त फायर उन पर खोल दिया। प्वाइंट की पहली पोस्ट कब्जाते हुए 4 जवान गोलियों से घायल हो गए थे।
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कारगिल विजय दिवस
संजय कुमार ने बताया कि इस हमले में जिन्हे गोलियां लग चुकी थी, वो असहनीय दर्द के बावजूद मुंह बंद कर वहीं सटे रहे, ताकि दूसरी पोस्ट पर बैठे दुश्मन को भारतीय जवानों की लोकेशन न मालूम चल जाए। रात गुजारने के बाद 5 जुलाई सुबह 10.30 बजे सूबेदार संजय कुमार समेत शेष सात जवान दूसरी पोस्ट कब्जाने केलिए आगे बढ़े। ये सभी जवान सिर्फ आंखों के इशारे से ही आगे बढ़ रहे थे। देखते ही देखते संजय कुमार दुश्मन के बंकर के एकदम नीचे अपने एक अन्य साथी नितेंद्र के साथ पहुंच गए।
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kargil-war
दुश्मन गड़बड़ी की आशंका के चलते अंधाधुंध फायरिंग किए जा रहा था। वहीं थोड़ी दूरी पर मौजूद संजय कुमार के सीनियर ने इशारा कर संजय से कहा कि वे बंकर से बाहर निकली उन दोनों गनों को खींचकर निकाल लें, जो लगातार फायरिंग कर रही है। चूंकि फायरिंग की वजह से बंदूकें की नालियां बहुत गर्मी थी, इसलिए तुरंत रणनीति बनाई गई। संजय ने अपने दूसरे साथ नितेंद्र को बाईं ओर जाकर बंकर पर ग्रेनेड फैंकने को कहा। ऐसा होते ही संजय ने अपने पास मौजूद फर्स्ट एड की पट्टियां हाथों पर बांधी और बंकर से दोनों बंदूकें खींच लीं।
संजय ने बताया कि बंदूकें हाथ में आते ही उन्होंने बंकर को तोड़ते हुए री-चेक फायर खोल दिया। कुछ पाकिस्तानी जवान मारे गए और कुछेक बंकर छोड़कर भाग खड़े हुए। इस ऑपरेशन में संजय को भी चार गोलियां (दो टांगों और दो पीठ व जांघ के बीच लगी।) दो साथी प्रवीण व श्याम शहीद हुए व आठ गंभीर रूप से घायल हुए। इस ऑपरेशन में संजय कुमार ने पाकिस्तानियों की 3 गन (1 एके-47) भी छीनी और गोलियां कम पड़ने पर दुश्मन की गन से ही फायरिंग दुश्मन पर खोलते हुए पोस्ट पर कब्जा किया। शाम 5.30 बजे ऑपरेशन खत्म हुआ और रिफोर्समेंट पहुंच गई।