कारगिल युद्ध को 20 साल होने जा रहे हैं। इस मौके पर ‘ऑपरेशन विजय, महसूस कीजिए’ के तहत वीर जवानों की जांबाजी के रोचक किस्से दिखाए जाएंगे।
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Kargil War
कारगिल युद्ध को दुनिया के इतिहास में सबसे मुश्किल युद्ध की श्रेणी में रखा जाता है। हमारे शूरवीरों ने अपने जान की आहुति देकर इस युद्ध को जीता था। बहुत से जवान जहां कारगिल की दुर्गम चोटियों से दुश्मन को खदेड़कर वहां तिरंगा लहराकर लौटे, वहीं काफी जवान तिरंगे में लिपटकर वापस आए। उनकी शहादत को देश आज भी नमन करता है। भारतीय सेना के कई जवान इस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे।
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कारगिल विजय दिवस
उन्हीं शूरवीरों के पराक्रम की कहानी और युद्ध के किस्सों को सेना अब लोगों तक एक खास अंदाज में पहुंचाना चाहती है। इसके लिए अभियान ‘ऑपरेशन विजय, महसूस कीजिए’ शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत सेना की एक विशेष विंग कारगिल युद्ध में जवानों और अफसरों के पराक्रम को सोशल मीडिया पर छोटे-छोटे हिस्सों में फोटो समेत वायरल करेगी। वायरल तस्वीरों को देखकर जनता शूरवीरों के अनसुने किस्सों को जानेगी और शहीदों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेगी।
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kargil war
रोज की घटनाओं पर तैयार किए जा रहे किस्से
कारगिल युद्ध मई 1999 में शुरू हुआ था और 26 जुलाई तक चला था। पाकिस्तान लाइन ऑफ कंट्रोल क्रॉस करके भारतीय सीमा में घुसकर कारगिल सेक्टर के विभिन्न हिस्सों में फैल गया था और दुर्गम चोटियों पर काबिज हो गया था। पाक जवानों को खदेड़ने के लिए ही यह युद्ध लड़ा गया था। ‘ऑपरेशन विजय, महसूस कीजिए’ के अंतर्गत युद्ध के दौरान रोज की घटनाओं को फोटो समेत वायरल किया जा रहा है, जो बेहद रोचक और ज्ञानवर्द्धक हैं।
कुछ ऐसे हैं ये किस्से
12 जून 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान टोलोजिंग पर कब्जे के लिए 2 राजपूताना राइफल ने हमला किया। टीम की कमान मेजर विवेक गुप्ता और मेजर मोहित सक्सेना के हाथ में थी। इसी दौरान सूबेदार भंवर लाल और कंपनी हवलदार मेजर यशवीर सिंह ने असीम शौर्य का परिचय दिया और वीरगति को प्राप्त हुए। 11 जून 1999 को 12 जेक एलआई के सूबेदार बहादुर सिंह 17400 फुट ऊंची चोटी पर दुश्मन से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।