मेट्रो में सफर करने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी खबर। दरअसल अब उनका रोज का यह सफर सुरक्षित होगा, हादसों का डर नहीं सताएगा। जानिए कैसे होगा ये चमत्कार?
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metro
देश में एक ऐसा सिस्टम तैयार किया गया है, जिससे परंपरागत कम्युनिकेशन सिस्टम की सटीकता गड़बड़ाने की वजह से एक ही ट्रैक पर चल रही मेट्रो ट्रेनों के एकदम नजदीक आकर टकराने की संभावनाएं भी खत्म होंगी। इससे हादसों की संभावनाएं कम होगी। ये है, कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम, जो देश में पहली बार मेट्रो ट्रेनों में हैदराबाद से लांच किया जाएगा।
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दिल्ली मेट्रो
- फोटो : FILE PHOTO
हैदराबाद के बाद यह तकनीक कोच्चि मेट्रो रेल प्रोजेक्ट में इस्तेमाल होगी और फिर इसे पहले से चल रही अन्य मेट्रो परियोजनाओं में भी प्रयोग किया जाएगा। हैदराबाद मेट्रो रेल लिमिटेड के महाप्रबंधक डी. सूर्यप्रकाशम ने बताया कि हैदराबाद में तैयार होने वाला यह मेट्रो प्रोजेक्ट दुनिया का सबसे बड़ा पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप) मोड बेस मेट्रो रेल प्रोजेक्ट है।
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इसकी कुल लागत 14132 करोड़ है, जिसमें भारत सरकार ने 12674 करोड़ निवेश किया, बाकी निवेश प्राइवेट कंपनियों से करवाया गया है। इसके अतिरिक्त प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण करने के लिए तेलंगाना सरकार ने 3000 करोड़ अलग से खर्च किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 नवंबर को हैदराबाद में मेट्रो प्रोजेक्ट का उद्घाटन करेंगे।
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लखनऊ मेट्रो
- फोटो : amar ujala
इस तरह काम करेगी तकनीक
कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम एक ऑटोमैटिक सिस्टम है, जो रेलवे को एक खास सिग्नल सिस्टम प्रोवाइड करेगा। यह सिस्टम रेल ट्रैफिक मैनेजमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर कंट्रोल के लिए ट्रेन व ट्रैक इक्विप्मेंट के बीच एडवांस टेली-कम्युनिकेशन स्थापित करेगा। यह कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम अभी मेट्रो और अन्य ट्रेनों में चल रहे मौजूदा सिग्नल सिस्टम की अपेक्षाकृत काफी ज्यादा सटीक होगा।
यह सिस्टम एक ही ट्रैक पर सरपट दौड़ने वाली ट्रेनों को बताएगा कि उससे आगे व पीछे चलने वाली ट्रेनों की बिलकुल सही लोकेशन क्या है और हादसों से बचने के लिए ट्रेनों को एक-दूसरे से कितनी दूरी पर कितनी स्पीड से चलना है।