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देश की आखिरी महारानी को अंतिम विदाई, कुछ ऐसी थी Royal Mother की जिंदगी

Thu, 27 Jul 2017 09:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला(पंजाब)
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देश की आखिरी महारानी मोहिंदर कौर पंचतत्व में विलीन
देश की आखिरी महारानी भी पंचतत्व में विलीन हो गई। उनकी अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग उमड़े। जानिए कैसी थी 'राजमाता' और उनकी जिंदगी।
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देश की आखिरी महारानी मोहिंदर कौर पंचतत्व में विलीन
पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की मां राजमाता मोहिंदर कौर (95) का सोमवार शाम निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार दोपहर 12.30 बजे पटियाला के शाही समाधां में किया गया। राजमाता मोहिंदर कौर को उनके बेटे कैप्टन अमरिंदर सिंह औा मालविंदर सिंह ने दोपहर 3:24 बजे मुखाग्नि दी। इसके बाद सिख धर्म के मुताबिक सुखमनी साहिब का पाठ हुआ और अरदास करवाई गई। रागी जत्थों में भाई कुलवंत सिंह ने गुरबाणी का इलाही कीर्तन किया।
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देश की आखिरी महारानी मोहिंदर कौर पंचतत्व में विलीन
राजमाता का अंतिम संस्कार उनके पति महाराजा यादविंदर सिंह की समाधि के पास किया गया। राजमाता मोहिंदर कौर का शव उनके आवास न्यू मोती बाग पैलेस की पहली मंजिल के हॉल में रखा गया था। उनकी शवयात्रा दोपहर करीबन 12:50 बजे न्यू मोती बाग पैलेस से निकली। 535 गाड़ियों का काफिला शवयात्रा में शामिल हुआ। पंजाब पुलिस के 500 से अधिक मुलाजिम व अधिकारी ड्यूटी पर तैनात किए गए थे।

 

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राजमाता के अंतिम संस्कार में कई सियासी दिग्गजों ने शिरकत की। राज्यपाल बीपी सिंह बदनौर, पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखवीर सिंह बादल, भाजपा प्रदेश प्रधान विजय सांपला, बिक्रम सिंह मजीठिया, हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत कई हस्तियों ने इस मौके पर पहुंचकर शोकाकुल परिवार के साथ दुख साझा किया। अंतिम संस्कार से पूर्व राजमाता के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी।
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14 सितंबर 1922 को मोहिंदर कौर का जन्म लुधियाना में हुआ था। मोहिंदर कौर ने लाहौर से पढ़ाई की थी। अगस्त 1938 में 16 साल की उम्र में राजमाता मोहिंदर कौर की शादी महाराजा यादविंदर सिंह से हुई थी। 1939 में पहली बेटी हेमइंदर कौर (नटवर सिंह की धर्मपत्नी) को जन्म दिया। इसके बाद बेटी रूपिंदर कौर का जन्म हुआ। कैप्टन अमरिंदर का जन्म 1942 में और राजा मालविंदर सिंह का जन्म 1944 में हुआ था।
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राजमाता के पिता हरचंद सिंह जेजी पटियाला रियासत प्रजा मंडल के मेंबर थे। जेजी सरदार सेवा ठीकरीवाला के सहयोगी व रिश्तेदार भी थे। हरचंद सिंह जेजी को स्टेट से निकाल दिया गया था, जिसके बाद जेजी यहां से लाहौर चले गये थे। राजमाता 1964 से 67 तक कांग्रेस पार्टी की तरफ से राज्यसभा और फिर 1967 से 71 तक लोकसभा सांसद रहीं। मोहिंदर कौर काफी समय से बीमार थीं। उन्हें ब्लड प्रेशर की समस्या और सांस नली में तकलीफ थी।
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इंदिरा गांधी ने राज परिवारों की शक्तियां खत्म कर दीं, प्रिवी पर्स भी खत्म कर दिया। इंदिरा गांधी किसी भी तरह राजपरिवारों के सदस्यों को सक्रिय राजनीति से भी दूर रखना चाहती थीं, इसलिए 1971 में मोहिंदर कौर को चुनाव के लिए नामित नहीं किया गया। वहीं, महाराजा यादविंदर सिंह को नीदरलैंड का एंबेसडर बना दिया गया और परिवार विदेश चला गया। 1974 में हेग में उनकी मृत्यु हो गई, उनके बड़े बेटे अमरिंदर सिंह महाराजा बने और मोहिंदर कौर राजमाता बन गईं।

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परिवार वापस मोती बाग पैलेस पटियाला लौट आया। पति की मृत्यु के बाद मोहिंदर कौर ने गहने, सिल्क आदि पहनना छोड़ दिया, वह सिर्फ सफेद और नीले रंग के कपड़े पहनती थीं। उनके सभी बच्चों की शादी हो चुकी थी और वे सैटल थे, लेकिन 1977 में इमरजेंसी के दौरान जबरन नसबंदी जैसे अत्याचारों के चलते महिंदर कौर ने जनता पार्टी ज्वाइन की। उन्हें महासचिव बनाया गया और वह जनता पार्टी से 1978 से 1984 तक राज्य सभा की सदस्य रहीं।
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राजमाता मोहिंदर कौर इतनी बरकत वाली औरत थी कि इन्होंने सारा महल व परिवार संभालकर एक मुट्‌ठी में करके रखा था। उन्हें अपने शाही शहर पटियाला से बेपनाह मोहब्बत थी। आज इन्हीं के नक्शेकदम इनकी बहू परनीत कौर भी चल रही हैं। एक बार मोहिंदर कौर ने पंजाब स्टेट में पाकिस्तान से आये शरणार्थियों के लिए शाही महल के अपने दरवाजे खोल दिये थे। वे खुद लंगर पकाती थीं। इन लोगों की सेवा राजमाता ने नंगे पैर और सिर ढककर की थी।
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