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ट्यूमर से जीतने के बाद ओलंपिक में रचा था इतिहास, इन्हें अब मिलेगा पद्मश्री

Fri, 27 Jan 2017 10:00 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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एथलीट दीपा मलिक
पहले ट्यूमर से जीतीं, फिर ओलंपिक में इतिहास रचकर देश का नाम रोशन किया। अब इन्हें पद्मश्री अवार्ड से नवाजा जाएगा। जानिए इनके बारे में सब कुछ।
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एथलीट दीपा मलिक
बात हो रही है, सोनीपत के भैंसवाल गांव की एथलीट दीपा मलिक की। दीपा मलिक ने स्पाइन ट्यूमर से जंग जीती और फिर खेल में मेडल के अंबार लगा डाले। रियो पैरालंपिक गेम्स में दीपा मलिक ने देश के लिए शॉटपुट इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही वे इन गेम्स में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला पैरा एथलीट भी बन गईं।
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एथलीट दीपा मलिक
30 सितंबर 1970 को हरियाणा के सोनीपत में जन्मीं दीपा मलिक 46 साल की दीपा मलिक, रिटायर्ड कर्नल बिक्रम सिंह की वाइफ हैं। वहीं उनके पिता कर्नल बीके नागपाल भी आर्मी में ही थे। दीपा की फैमिली में पति के अलावा दो बेटियां हैं। उनकी बड़ी बेटी का नाम देविका है और छोटी बेटी का नाम अम्बिका है। दीपा ने 36 साल की उम्र में अपने खेल की शुरुआत की थी।

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एथलीट दीपा मलिक
दीपा मलिक को 17 साल पहले 29 की उम्र में लकवा मार गया और कमर के नीचे का पूरा हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था। इस बीमारी की शुरुआत में पहले उनकी टांगों में कमजोरी की शिकायत आई थी। बाद में पता चला कि उनके स्पाइनल कॉर्ड में ट्यूमर है। इसके बाद उनका ऑपरेशन हुआ, लेकिन 1999 में दोबारा परेशानी महसूस होने के बाद उनका दूसरा ऑपरेशन हुआ। इस दौरान उनके पति कारगिल में थे।
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एथलीट दीपा मलिक
तीसरी सर्जरी से पहले दीपा को बता दिया गया था कि अब उनकी बाकी जिंदगी व्हीलचेयर पर बीतेगी। जिसके बाद उन्हें सात दिन का वक्त दिया गया था, कि वे जी भरकर चल फिर लें। दीपा मलिक देश की पहली महिला हैं, जिन्हें मोडिफाई व्हीकल चलाने का लायसेंस मिला था। दीपा भले ही एक आम महिला की तरह चल-फिर नहीं पाती हैं, लेकिन फिर भी उनकी लाइफ बिल्कुल आम महिला की तरह है।
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दीपा को शॉटपुट के अलावा भी कई गेम्स में महारथ हासिल है। वे जेवलिन थ्रो, डिस्कस थ्रो, स्विमिंग और मोटर स्पोर्ट्स से भी जुड़ी हुई हैं। एक स्पोर्ट्स पर्सन होने के अलावा दीपा एक एंटरप्रेनर भी रही हैं। उन्होंने 7 सालों तक कैटरिंग और रेस्टोरेंट बिजनेस भी किया है। इसके अलावा दीपा एक मोटिवेशनल और इंस्पिरेशनल स्पीकर भी हैं। वे अलग-अलग इवेंट्स में लोगों को मोटिवेट करने के लिए स्पीचेस देने जाती रहती हैं।
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दीपा मलिक ने अपनी उम्र से ज्यादा स्वर्ण पदक जीत कर जज्बे, जोश और जीवटता की मिसाल पेश कर दी है। दीपा की उम्र 46 साल है और उसके पास 50 से ज्यादा स्वर्ण पदक हैं। दीपा मलिक की सल्तनत केवल अपने ही देश में नहीं है, वह विदेशों में पहले भी अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी है। दीपा शॉट पुटर के अलावा स्विमर, बाइकर, जेवलिन व डिस्कस थ्रोअर है।

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7 साल पहले जीता था पहला पदक: दीपा ने 2009 में शॉट पुट में अपना पहला पदक(कांस्य) जीता था। इसके अगले ही साल ऐसा कमाल किया कि इंग्लैंड में शॉटपुट, डिस्कस थ्रो और जेवलिन तीनों में गोल्ड मेडल जीते। उस साल दीपा के सितारे बुलंदी पर रहे और उसने चाइना में पैरा एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता। वहां कांस्य जीतने वाली दीपा पहली भारतीय महिला बनीं।

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एथलीट दीपा मलिक
सामाजिक कार्य और लिखने में रुचि रखती हैं दीपा: दीपा खेल में ही आगे नहीं है, वह वह सामाजिक कार्य करने के साथ-साथ लेखन भी करती हैं। गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए कैंपेन चलाती है और सामाजिक संस्थाओं के कार्यक्रमों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती हैं। दीपा को लिखने का शौक है और वह अपनी बायोग्राफी से लेकर खिलाड़ियों के बारे में लिखती हैं।

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दीपा की उपलब्धियां: दीपा ने 2011 में वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीता तो उसी साल शरजहां में वर्ल्ड गेम्स में दो कांस्य पदक जीते। वर्ष 2012 में मलेशिया ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जेवलिन व डिस्कस थ्रो में दो स्वर्ण पदक जीते। 2014 में चाइना ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप बीजिंग में शॉटपुट में स्वर्ण पदक जीता। उसी साल इंच्योन एशियन पैरा गेम्स में रजत पदक जीकर रिकॉर्ड बनाया। यह साल भी दीपा मलिक के लिए बेहतर रहा है और पैरालंपिक में रजत से पहले ही दुबई में ओसिएनिया एशियन चैंपियनशिप में जेवलिन थ्रो में स्वर्ण व शॉटपुट में कांस्य पदक जीता।
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ये मिले अवार्ड: दीपा को राष्ट्रपति रोल मॉडल अवार्ड-2014, लीडर एशिया एक्सीलेंस अवार्ड-2014, लिम्का पीपल ऑफ द ईयर अवार्ड-2014, कांगो करमवीर पुरस्कार-2014, एमेजिंग इंडिया अवार्ड-2013, करमवीर चक्र अवार्ड-2013, अर्जुन अवार्ड-2012, एक्सीलेंस अवार्ड फॉर स्पोर्ट्स-2012, महाराणा मेवाड़ अरावली स्पोर्ट्स अवार्ड-2012, मिसाल ए हिम्मत अवार्ड-2012, महाराष्ट्र छत्रपति अवार्ड स्पोर्ट्स-2009-10, हरियाणा करमभूमि अवार्ड-2008, स्वावलंबन पुरस्कार महाराष्ट्र-2006 आदि से नवाजा गया है।
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