देश भर में डेंगू ने कोहराम मचा रखा है। जहां देखो वहां डेंगू के लारवा मिल रहे। मरीजों की संख्या बढ़ रही, लेकिन क्या आप जानते हैं लारवा पनपता कैसे है? रिपोर्टः आशीष वर्मा
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Pics: कैसे पनपता है डेंगू का लारवा, देखना और जानना चाहेंगे
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डेंगू इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर रुके पानी में अंडे देते हैं। इस मच्छर को पनपने के लिए दो चम्मच पानी काफी होता है। अंडे बनने में दो से तीन दिन का वक्त लगता है। चार से सात दिन के भीतर अंडे से लारवा बनते हैं। फिर लारवा से एक से तीन दिन में प्यूपा और फिर एडल्ट मच्छर। छह से सात दिन के भीतर अंडे से वयस्क मच्छर बनते हैं।
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मादा मच्छर ज्यादातर दिन में ही लोगों को काटता है। सूरज उगने के दो घंटे बाद और सूरज डूबने के दो घंटे पहले सबसे अक्रामक होता है। आफिसों में यह फाइलों के बीच, मेज के नीचे छिपकर रहता है। अमूमन रात के वक्त यह मच्छर निस्क्रिय माना जाता है।
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डेंगू का वायरस जब इंसान के अंदर जाता है तो मरीज को बुखार की फीलिंग आने लगती है। वायरस करीब दो से सात दिन तक रहता है, जबकि बुखार तीन से 14 दिन तक रहता है। डेंगू के लक्षण बुखार खत्म होने के दौरान देखने को मिलते हैं।
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पीजीआई स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एचओडी व प्रोफेसर राजेश कुमार ने बताया कि आज से तीन साल पहले थाइलैंड में डेंगू के लिए वैक्सीन तैयार हुई थी, लेकिन चार अलग-अलग वायरस होने के कारण वह सभी पर कारगर साबित नहीं हुई।
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डेंगू का वायरस चार तरह का होता है। डेन-1, डेन-2, डेन-3, डेन-4। इंटरनेशनल जरनल लान्सेंट में प्रकाशित स्टडी के मुताबिक डेंगू डेन-2 पर ज्यादा प्रभावी साबित नहीं हुआ, इसलिए वैक्सीन का काम सफल नहीं हो पाया, लेकिन थाईलैंड के वैज्ञानिक फिर से इस पर जुट गए हैं। उम्मीद है कि जल्द ही यह काम पूरा हो जाए।
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प्रोफेसर राजेश के मुताबिक जब भी डेंगू या किसी दूसरी बीमारी का आउटब्रेक होता है तो उस दौरान लोगों की इम्युनिटी उसके मुकाबले मजबूत बन जाती है। उसके बाद नए लोग आते हैं, जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है, इसलिए बीमारी का रेशियो बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि इसका फिलहाल कोई इलाज नहीं है। डेंगू होने पर पानी की कमी न होने दें।
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सेक्टर 16 जीएमएसएच के मेडिसिन के डाक्टर मंजीत सिंह ने बताया कि डेंगू के सभी पेशेंट को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। यदि प्लेटलेट्स 10 हजार से कम हो जाए या फिर नाक, मसूढ़ों, पेशाब और मलत्याग के समय रक्तस्राव होने लगे तो प्लेटलेट्स चढ़ान की जरूरत पड़ती है। रक्त की कमी से कई अंग काम करना बंद कर देते हैं।
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एचओडी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई के प्रोफेसर राजेश कुमार कहते हैं कि डेंगू की भले ही वैक्सीन न बनी हो, लेकिन इस बीमारी को लोग आसानी से रोक सकते हैं। हमें मच्छर न पनपने के जागरुकता अभियान पर ध्यान देना होगा। यदि मच्छर नहीं पैदा होंगे तो डेंगू भी नहीं फैलेगा।
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चंडीगढ़ में अब तक 120 डेंगू के कंफर्म केस आए हैं। 40 फीसदी केस की उम्र 11-33 साल के बीच है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ग के लोग कामकाजी और स्टूडेंट होते हैं। इसका मतलब यह है कि जहां पर ये लोग जा रहे हैं, वहां पर डेंगू के मच्छर ने उन्हें काटा है। इस आयु वर्ग के बाद 45 साल तक की उम्र के लोग पीड़ित हैं।
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चंडीगढ़ की मलेरिया विंग को इस बार चौकाने वाली जगह से लारवा मिले हैं। इंडस्ट्रियल एरिया सबसे रिस्की जगहों में गिना जाता था। लेकिन इस बार वहां से एक भी लारवा नहीं मिले, जबकि गमलों के नीचे रखी जाने वाली ट्रे, पक्षियों को पीने के लिए रखे जाने वाले बर्तन और धार्मिक भवन से सबसे ज्यादा लारवा मिले हैं। इसके अलावा घरों में रखे गए पौधों से भी लारवा मिले हैं।
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मलेरिया विंग की टीम का कहना है कि फील्ड में जो टीम है, उससे मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस स्टेशन में पुराने वाहन काफी संख्या में है। उन वाहनों में पानी जमा होने का खतरा रहता है। ऐसे में लारवा मिलने की संभावना ज्यादा है, इसलिए रोजाना वहां पर फोगिंग कराने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा धार्मिंक भवनों में लगे कूलरों की जांच का काम तेज कर दिया गया है। रोजाना मॉनिटरिंग रखी जा रही है।