लाल बैग नहीं, हनीप्रीत ने राम रहीम को भगाने के लिए ये इशारा किया था, लेकिन डीएसपी ने उसके मंसूबों पर ऐसा पानी फेरा कि सब कुछ खत्म हो गया।
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honeypreet
- फोटो : अमर उजाला
एसआईटी की चार्जशीट के मुताबिक, डेरा प्रमुख को दोषी करार दिए जाने के बाद हनप्रीत ने गर्दन हिलाते हुए पीए राकेश को इशारा किया, जिसका मतलब हिंसा भड़काने के लिए तैयार रहने का निर्देश था। डेरा प्रमुख को फरार कराने की साजिश रची गई थी, जिसमें पीए राकेश और बबलू भी शामिल था।
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- फोटो : अमर उजाला
चार्जशीट के मुताबिक, प्लानिंग के तहत पुलिस, प्रशासन, सरकार, मीडिया मुख्य तौर पर निशाने पर थे, जबकि आम लोग भी हिंसा के दौरान बुरी तरह प्रभावित हुए। जबकि जिस मकसद से साजिश रची गई, वो पूरा भी नहीं हो पाया था।
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राम रहीम के साथ हनीप्रीत (फाइल फोटो)
दोषी करार होने के बाद बाहर आने पर राम रहीम का लाल रंग का बैग मांगना भी साजिश का हिस्सा था। लाल रंग को खतरे के कोडवर्ड के तौर पर प्रयोग किया गया। इसके बाद ही डेरा अनुयायी हिंसा पर उतारू हुए।
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राम रहीम के साथ हनीप्रीत (फाइल फोटो)
डेरामुखी ने कहा कि बैग में उसके कपड़े हैं, लेकिन वास्तव में यह संकेत था जिससे उसके समर्थकों को संदेश मिल जाए कि अब उपद्रव शुरू कर देना है। उन्होंने बताया कि जैसे ही बैग गाड़ी से बाहर निकाला गया, दो तीन किलोमीटर दूर से आंसू गैस के गोले छूटने की आवाजें आने लगीं।
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हनीप्रीत के साथ राम रहीम
दूसरी ओर, हनीप्रीत ने गर्दन हिलाकर सुरक्षाकर्मियों को बाबा को भगाने का इशारा कर दिया। लेकिन पुलिस ने उन्हें डीसीपी (क्राइम) सुमित कुमार की गाड़ी में बैठा दिया, इस दौरान कई वर्षों से बाबा की सुरक्षा में लगे कमांडो ने उन्हें घेर लिया।
डीसीपी सुमित और कमांडो के बीच झड़प हो गई। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने कमांडो की धुनाई कर दी। इसी बची बाबा को ले जाने के लिए रूट बदलने का फैसला हुआ और पुलिस बाबा को हेलिकाप्टर तक ले गई।