खेतीबाड़ी करने वाले अनपढ़ पिता के इस होनहार बेटे के जज्बे को सलाम कीजिए। जिस जगह पर लगे पेड़ के नीचे सोता था, आज उसी जगह का वो डायरेक्टर बन गया।
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डॉ. जगतराम बने चंडीगढ़ पीजीआई के नए डायरेक्टर
नाम है डॉ. जगतराम। उन्होंने शुक्रवार शाम साढ़े सात बजे कैरों ब्लॉक में उन्होंने चंडीगढ़ पीजीआई के डायरेक्टर का कार्यभार संभाला। डॉ. जगतराम पिछले 38 वर्षों से पीजीआई के ऑप्थल्मोलॉजी (आई) डिपार्टमेंट में हैं। वह दो साल पहले इस विभाग के हेड बने। उनके 300 से ज्यादा रिसर्च पेपर हैं और 40 से ज्यादा नेशनल और इंटरनेशनल प्रोजेक्ट पर काम कर चुके हैं। डाक्टर जगतराम बताते हैं कि एमडी की परीक्षा के दौरान पैसे न होने के कारण उन्हें पीजीआई में पेड़ के नीचे सोकर रात गुजारनी पड़ी थी।
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डॉ. जगतराम बने चंडीगढ़ पीजीआई के नए डायरेक्टर
डा. जगतराम का जन्म हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के राजगढ़ के पबियाना गांव के एक गरीब व अनपढ़ किसान ध्यानूराम के घर हुआ। डॉ. जगतराम ने गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल राजगढ़ से पढ़ाई शुरू की। डॉ. जगतराम के पिता ध्यानुराम आज भी खेतीबाड़ी करते हैं। लेकिन ध्यानुराम और फुलमु देवी ने बेटे जगतराम को पढ़ाई पूरी करने का लक्ष्य दिया। डॉ. जगतराम ने पहले गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ाई पूरी की और फिर खुद डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय किया। वह अपनी योग्यता, मेहनत और लगन के बल पर यहां तक पहुंचे हैं।
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डॉ. जगतराम बने चंडीगढ़ पीजीआई के नए डायरेक्टर
ये जानते हुए भी कि हिंदी मीडियम में पढ़ने के बाद शिमला जाकर कॉन्वेंट स्कूलों से अंग्रेजी मीडियम में पढ़कर आए स्टूडेंट्स के बीच कड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा, उन्होंने आईजीएमसी शिमला से 1973 में एमबीबीएस में एडमिशन हासिल किया। 1979 में पीजीआई ज्वॉइ किया। डा. जगतराम ने बताया कि जब वे 38 साल पहले एमडी की परीक्षा देने आए थे, तब उनकी जेब में पैसे तक नहीं थे। दोस्तों ने फीस और रास्ते के किराए का इंतजाम किया था। उनके पिता की उम्र 94 साल है। अपने सौम्य व्यवहार की वजह से साथियों और मरीजों में काफी लोकप्रिय हैं।
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डॉ. जगतराम बने चंडीगढ़ पीजीआई के नए डायरेक्टर
डॉ. जगतराम की पत्नी आशा, बड़ी बेटी शिखा और उनके पति अमन सिंगला, छोटी बेटी डॉ. शिल्पा और उनके पति स्वनिल बराड़ इस उपलब्धि पर खुश हैं। डायरेक्टर को चुनने के लिए गठित की गई सेलेक्शन कमेटी ने जो मेरिट बनाई गई थी, उसमें उनका तीसरा नंबर था। पहले नंबर पर इंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. अनिल भंसाली, दूसरे नंबर पर पीडियाट्रिक की प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह थी। मेरिट में पहला स्थान होने के कारण डॉ. भंसाली के डायरेक्टर चुने जाने की काफी संभावना जताई जा रही थी, लेकिन यही बात उनके डायरेक्टर बनने में बाधा बन गई।
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डॉ. जगतराम बने चंडीगढ़ पीजीआई के नए डायरेक्टर
डॉ. जगतराम के 38 साल के कैरियर में उन पर कोई दाग नहीं लगा। पीजीआई की वरिष्ठता सूची में तीनों फाइनलिस्टों में सबसे सीनियर। अनुसूचित जाति के राष्ट्रीय आयोग ने जांच में पाया था कि डा. जगतराम सबसे अनुभवी हैं। दस हजार से ज्यादा आंखों की सर्जरी। 24 से ज्यादा नेशनल व इंटरनेशनल अवार्ड। कई सारी सर्जरी की नई तकनीक ईजाद की। विश्व की सबसे बड़ी अमेरिकन सोसाइटी कैटरेक्ट एंड रीफ्रक्टिव सोसाइटी की ओर से बेस्ट आफ दी बेस्ट विनर के अवार्ड से सम्मानित।
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डॉ. जगतराम बने चंडीगढ़ पीजीआई के नए डायरेक्टर
पदभार संभालने के बाद प्रो. जगतराम ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य पीजीआई को नए मुकाम पर ले जाना है। कर्मचारियों और फैकल्टी मेंबर को साथ लेकर एक टीम वर्क के साथ काम करना है। न्यू ओपीडी और इमरजेंसी की भीड़ की समस्या का तकनीकी तौर पर समाधान निकालने पर जोर दिया जाएगा। पेशेंट केयर, रिसर्च और ट्रेनिंग के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करना उनकी मुख्य प्राथमिकता में शामिल है।
पीजीआई के एडमिनिस्ट्रेशन में हिमाचल का दबदबा बढ़ गया है। डायरेक्टर डा. जगतराम के अलावा पीजीआई के डिप्टी डायरेक्टर अमिताभ अवस्थी हिमाचल कैडर के आईएएस, फाइनेंशियल एडवाइजर सुशील ठाकुर भी हिमाचल से ताल्लुक रखते हैं। सीनियर विजिलेंस आफिसर केवल शर्मा हिमाचल कैडर के एचएएस, सीनियर एओएच (हास्पिटल) सुधीर कुमार हिमाचल कैडर के एचएएस, सीनियर एओएच इंस्टीट्यूट प्रीतपाल राणा हिमाचल कैडर के एचओएस, सीनियर एओएच एचआर नरेंद्र आहलुवालिया हिमाचल कैडर के एचएएस, रजिस्ट्रार मनोज कुमार हिमाचल कैडर के एचएएस हैं। इसके अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी हिमाचल से ताल्लुक रखते हैं।