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आपके बच्चे की हेल्थ, व्यवहार व आदतों से जुड़े 5 सवाल और उनके जवाब, हैं बेहद फायदेमंद

Fri, 25 Jan 2019 04:36 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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baby
आपके बच्चे के स्वास्थ्य, व्यवहार और आदतों से जुड़े पांच सवाल और उनके जवाब पढ़िए, जो मां-बाप के लिए बेहद फायदेमंद रहेंगे। क्लिक कीजिए और पढ़ें...
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new born baby - फोटो : Social Media
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के प्रेसिडेंट डॉ. नीरज कुमार के पास जन्मे बच्चे की सेहत से लेकर चंडीगढ़ की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था का इलाज है। वे कहते हैं कि जब तक चंडीगढ़ के आसपास के शहरों में हेल्थ सिस्टम मजबूत नहीं होता और पीजीआई को रेफरल इंस्टीट्यूट नहीं बनाते, तब तक इसका समाधान नहीं निकल सकता। वे इस बात की पैरवी करते हैं कि चंडीगढ़ में छोटे नर्सिंग होम होने चाहिए। इससे मरीजों का कम पैसे में अच्छा इलाज मिल सकता है। उनका कहना है कि यदि छह महीने की उम्र में ही शिशु को अंडा और दालें मिलना शुरू हो जाएं तो वे तंदुरुस्त रहेंगे।
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new born baby - फोटो : social media
सवाल : शिशुओं के एनीमिक होने के क्या कारण हैं?
जवाब :
इसके तीन कारण हैं। भारत की अधिकतर महिलाएं एनीमिया से पीड़ित होती हैं। जब बच्चा गर्भ में होता है तो वह मां से ही आयरन लेता है। जब उसकी मां एनीमिया से पीड़ित होंगी तो वह कम आयरन लेगा। दूसरा कारण, अधिकतर लोग वेजिटेरियन होते हैं। नॉन वेजिटेरियन के मुकाबले वेजिटेरियन में कम आयरन होता है। तीसरा, बोतल से ज्यादा दूध पीना। दूध में आयरन कम होता है।

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newborn baby - फोटो : social media
सवाल : इसका क्या उपाय है?
जवाब :
छह महीने के बाद बच्चों को खाने की आदत डालनी चाहिए। दलिया, दाल और खिचड़ी को खिलाएं। नॉन वेजिटेरियन हैं तो छह महीने बाद अंडा खिलाना शुरू कर देना चाहिए। जो बच्चे प्री-मेच्योर होते हैं, उन्हें आयरन की अलग डोज देनी चाहिए। एक बात और ध्यान रखनी होगी कि बच्चों को जब खिलाएं, उन्हें टीवी या मोबाइल से चिपका न रखें। यदि ऐसा करेंगे तो उनमें खाने की आदत नहीं पड़ेगी। बच्चों को जब भी खाना खिलाएं तो उनके साथ इनवाल्व हों।
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सवाल : चंडीगढ़ में मरीजों का बोझ बढ़ चुका है। हर जगह लंबी लाइनें हैं?
जवाब:
सबसे ज्यादा दबाव पीजीआई पर है। एक स्टडी के मुताबिक पीजीआई के पीडियाट्रिक इमरजेंसी में आने वाले 60-70 फीसदी बच्चे बाहर से आते हैं। देरी से इलाज मिलने से कई बच्चों की मौत भी हो जाती है। ऐसे में जब तक चंडीगढ़ के आसपास के इलाकों में हेल्थ केयर मजबूत नहीं होगा, तब तक पीजीआई सहित चंडीगढ़ के सभी अस्पतालों में भीड़ बढ़ती जाएगी और पीजीआई को मजबूत रेफरल इंस्टीट्यूट बनाना होगा, तभी पीजीआई का मकसद पूरा हो पाएगा।
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सवाल : चंडीगढ़ में छोटे नर्सिंग होम नहीं है? होने चाहिए या नहीं।
जवाब :
साल 2000 के दौरान चंडीगढ़ में छोटे नर्सिंग होते थे। लेकिन सोसाइटी और सरकार ने इन्हें बंद करा दिए। एक नर्सिंग होम को चलाने के लिए 30-35 लाइसेंस लेने होते हैं। ऐसे में कौन चला पाएगा नर्सिंग होम। जबकि नर्सिंग होम में इलाज सस्ता होता है और अच्छी केयर मिलती है। यदि छोटे नर्सिंग होम खुल जाएं तो बोझ भी काफी कम हो सकता है। इस बारे में यूटी प्रशासन को सोचना चाहिए।
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baby hold mother hand
सवाल : समाज में आईएमए का क्या योगदान है।
जवाब :
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सरकार, पब्लिक और डाक्टर के बीच की कड़ी है। सरकार कोई पालिसी बनाती है तो आईएमए उसमें फीडबैक देती है। पब्लिक के लिए समय-समय पर मेडिकल कैंप आयोजित करती रहती है। साथ ही डॉक्टरों की सुरक्षा और उन्हें अपडेट के लिए गोष्ठियां भी करवाती है।
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