देश में एक आईएएस अफसर ऐसा, जो 34 साल की नौकरी में 71ट्रांसफर झेल चुके हैं और अब 'अनोखी' रिटायरमेंट ले रहे हैं। जानिए कौन हैं...
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आईएएस प्रदीप कासनी
हम बात कर रहे हैं हरियाणा के चर्चित आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी, जो 34 वर्ष की प्रशासनिक सेवा देने के बाद बिना वेतन ही सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। 28 फरवरी 2018 को वे रिटायर हो गए। राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने उनकी भारतीय प्रशासनिक सेवा से रिलीविंग को मंजूरी दे दी। खास बात ये कि कासनी को सितंबर 2017के बाद से वेतन ही नहीं मिला है और बिना वेतन ही रिटायरमेंट ली।
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आईएएस प्रदीप कासनी
ऐसा इसलिए, क्योंकि वे लैंड यूज बोर्ड के ओएसडी पद से रिटायर हो रहे हैं और सरकार के रिकार्ड में उस पद का कोई वजूद ही नहीं है। उन्होंने इसके खिलाफ सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में अपील की है, जिस पर 8 मार्च को फैसला आएगा। प्रदेश सरकार ने उन्हें 23 अगस्त 2017 को हरियाणा लैंड यूज बोर्ड में नया पद सृजित कर ओएसडी लगाया था।
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IAS officer Pradeep Kasni
- फोटो : File Photo
लेकिन इस पद पर उन्हें सेलरी नहीं दी गई। जब उन्होंने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि लैंड यूज बोर्ड कहीं अस्तित्व में ही नहीं है। आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी गई तो सरकार ने बताया कि इसे तो वर्ष 2008 में ही खत्म किया जा चुका है। इससे कासनी के पैरों तले जमीन खिसक गई। कासनी ने इस अन्याय के विरुद्ध कैट यानि केंद्रीय प्रशासनिक अभिकरण का दरवाजा खटखटाया हुआ है।
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pradeep kasni
उनकी मांग है कि उनके तबादला आदेश रद्द किए जाएं। कैट में उनके मामले की सुनवाई चल रही है। उन्हें वेतन, गाड़ी व ऑफिस देने के आदेश कैट कुछ माह पहले कर चुका है, लेकिन सरकार के गले की फांस यह बन गई है कि उन्हें वेतन दें तो किसी पद के विपरीत। चूंकि, जहां वह तैनात हैं, वह किसी विभाग के तहत आता ही नहीं। इसलिए सरकार अभी तक वेतन नहीं दे पाई है। हालांकि, उन्हें दफ्तर तो नव सचिवालय में दे दिया गया था।
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pradeep kasni
वेतन न लूं तो जीऊं कैसे, लूं तो नैतिकता पर चोट
आईएएस प्रदीप कासनी ने कहा कि वह पब्लिक सर्वेंट हैँ। उन्हें वेतन जनता के लिए काम करने का मिलता है। जिस पद व विभाग में लगाया है, वह अस्तित्व में नहीं। इसकी जानकारी खुद सरकार ने आरटीआई में दी है। अगर वह वेतन नहीं लें तो जिएं कैसे और लें तो उनकी नैतिकता पर चोट होती है। चूंकि, वह काम तो कोई कर नहीं रहे। अगर उनकी पेंशन में कोई दिक्कत आती है तो उनके सामने कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प है। कैट में उनके मामले की अगली सुनवाई सात मार्च को होगी। उम्मीद है कि न्याय मिलेगा।
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फेसबुक पेज पर बाबा रामदेव पर लिखी पोस्ट वायरल
- फोटो : social media
मंडलायुक्त गुरुग्राम के पद से शुरू हुआ खराब दौर
1972 बैच के अधिकारी कासनी ने 1997 में आईएएस पदोन्नत होने के बाद अहम जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन बेबाकी के चलते एक पद पर अधिक समय तक नहीं रह पाए। उन्होंने हरियाणा सरकार के साथ 1984 में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। वर्तमान भाजपा सरकार से उनका छत्तीस का आंकड़ा ही रहा और गुरुग्राम के मंडलायुक्त पद पर सेवाएं देने के दौरान मुआवजा निर्धारण में दो का गुणांक लगाने के चलते न केवल वह पद से हटाए गए, बल्कि उसके बाद भी निशाने पर ही रहे।
सबसे ज्यादा तबादले हुड्डा सरकार में हुए
प्रदीप कासनी के सबसे ज्यादा ट्रांसफर भूपेंद्र सिंह हुड्डा (कांग्रेस) की सरकार में हुए। खट्टर सरकार के साढ़े 3 साल के कार्यकाल में सितम्बर 2016 में एक महीने के अंदर 3 बार कासनी का ट्रांसफर किया गया। अक्टूबर 2015 में खट्टर सरकार आने के बाद कासनी को अहम पदों पर तैनाती की उम्मीद थी, लेकिन गुड़गांव मंडल कमिश्नर की नियुक्ति के बाद यह उम्मीद धरी की धरी रह गई।