रेप और गैंगरेप करने की सजा को लेकर बहुत बड़ा बदलाव किया गया है। कई धाराओं में संशोधन करते हुए सजा बदल दी गई है, ध्यान से पढ़ लें सभी।
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Rape
- फोटो : Demo Photo
दरअसल, बदलाव की यह पहल हरियाणा सरकार ने की है। हरियाणा में अब 12 साल की बच्चियों के साथ दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म पर अब फांसी की सजा होगी। दुष्कर्म के दोषी को कम से कम 14 वर्ष और सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों को कम से कम बीस साल सश्रम कारावास का भी प्रावधान किया गया है। इसे आजीवन कारावास या दोषी के प्राकृतिक जीवन की बाकी अवधि तक बढ़ाने को भी मंजूरी दी गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
हरियाणा के इतिहास में अब तक यह सबसे बड़ा निर्णय मंगलवार शाम को मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। प्रदेश सरकार ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376ए, 376डी, 354, 354डी(2) जैसे कानूनों में संशोधन करने को स्वीकृति दी है। जिससे फांसी की सजा व अन्य सजा का प्रावधान कानून में किया जाएगा।
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Gang-rape
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि बच्चियों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों से जुड़े मौजूदा आपराधिक कानूनों को मौत की सजा समेत सजा में वृद्धि कर और अधिक कठोर बनाया गया है।इसका मकसद अपराधियों पर अंकुश लगाना है। हाल ही में प्रदेश में हुए जघन्य अपराधों के मद्देनजर उन्होंने कठोर कानून लाने का वादा किया था, जिसे पूरा कर दिया गया है।
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शादी का झांसा देकर दुराचार
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सरकार ने इन संशोधन को दी मंजूरी
- आईपीसी की धारा 376 ए, ए के तहत जोड़ी गई धारा के अनुसार जो कोई भी 12 वर्ष तक की आयु की किसी बच्ची से दुष्कर्म करता है, उसे मृत्यु या 14 वर्ष तक के सश्रम कारावास की सजा हो सकती है। इसे दोषी के प्राकृतिक जीवन की शेष अवधि के लिए कारावास तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
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Child Rape
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- आईपीसी की धारा 376 डी, ए के तहत एक अन्य प्रावधान किया गया है कि यदि समूह बनाकर एक या अधिक आरोपी 12 वर्ष तक की आयु की किसी बच्ची का दुष्कर्म करते हैं, या सामान्य इरादे के तहत ऐसा करते हैं, तो उन सभी को बलात्कार का दोषी माना जाएगा और मृत्यु की सजा या कम से कम 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया जाएगा, जो जुर्माने के साथ दोषी के प्राकृतिक जीवन की शेष अवधि तक बढ़ाई जा सकती है। जुर्माना पीड़ित के चिकित्सा खर्चों और पुनर्वास संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए उचित व तर्कसंगत होगा व उसे दिया जाएगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- आईपीसी की धारा 354 के तहत शीलभंग करने के इरादे से या यह जानते हुए कि इससे शीलभंग हो सकता है, आरोपी किसी महिला पर हमला करता है या आपराधिक बल प्रयोग करता है, तो उसे कम से कम दो साल के कारावास की सजा का प्रावधान है, इसे अब सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा। इसके साथ ही जुर्माना भी लगेगा।
- आईपीसी की धारा 354 डी (2) के तहत यदि कोई व्यक्ति अपराध करता है या पीछा करता है, तो उसे पहला दोष सिद्ध होने पर अधिकतम तीन साल तक के कारावास और जुर्माने की सजा हो सकती है। दूसरी बार या अनुवर्ती दोष सिद्ध होने पर उसे कम से कम तीन वर्ष के कारावास की सजा हो सकती है, जिसे जुर्माने के साथ सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा।