इस सीएम के दादा-पिता मजदूरी किया करते थे। खुद भी साइकिल पर सब्जी बेचीं। लेकिन हिम्मत ऐसी, सभी मुश्किलों का सामना किया और आज एक राज्य के मुख्यमंत्री है।
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अमित शाह और CM खट्टर के बीच बातचीत
बात हो रही है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मनोहर' सीएम की। याद आया कुछ, आज यानी 5 मई को इनका 63वां जन्मदिन है। जी हां, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर एक पंजाबी फैमिली से हैं। वे काफी समय तक आरएसएस से जुड़े रहे, वहां पर पीएम मोदी भी उनके साथ थे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी इनके हालात इतने इतने खराब थे कि साइकिल पर सब्जियां बेचने के लिए जाया करते थे।
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Haryana CM Manohar lal khattar
- फोटो : अमर उजाला
सीएम खट्टर के पिता का नाम हरबंसलाल था। वे 1947 में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त परिवार को लेकर रोहतक आ गए थे। परिवार की आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण उनके पिता और दादा को मजदूरी तक करनी पड़ी। जैसे तैसे करके पैसे इकट्ठे किए गए और जमीन खरीदकर खेती बाड़ी शुरू की, लेकिन हालात में ज्यादा सुधार नहीं हुआ।
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khattar
- फोटो : अमर उजाला
मनोहर लाल खट्टर पांच भाई है। एक भाई जगदीश दिल्ली में रहते हैं और एक भाई गुलशन बनियानी गांव में ही खेती देखते हैं। उनके दो भाई रोहतक में रहते हैं। उनसे छोटे तीसरे नंबर के भाई चरणजीत ही नौकरी में थे। वे टीचर बने और हाल ही में सरकारी स्कूल से रिटायर हुए हैं। सीएम का मकान 1974 में बनियानी में बना था। यह 150 गज की जमीन पर बना है, जिसमें तीन कमरे हैं।
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सीएम खट्टर
मनोहर लाल खट्टर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पंडित नेकी राम शर्मा गवर्नमेंट कॉलेज से की। उनके पिता उन्हें आगे पढ़ने देना नहीं चाहते थे। वे चाहते थे कि उनका बेटा उनके काम में हाथ बटाए, लेकिन मनोहर आगे पढ़ाई कर डॉक्टर बनना चाहते थे। हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे घरवालों से पैसे उधार लेकर दिल्ली चले आए और दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन की पढ़ाई पूरी कर मेडिकल की तैयारी करने लगे।
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khattar
- फोटो : अमर उजाला
मनोहर लाल ने तीन बार प्री मेडिकल दिया, पर क्लीयर नहीं हो सकता। तभी उन्होंने कमाई करने के लिए दुकान करने की सोची और दिल्ली के सदर मार्केट में कपड़ों की दुकान पर खोल ली। पांच भाइयों में सबसे बड़े मनोहर लाल को शुरू से ही जल्दी उठने की आदत थी। वे ना केवल खुद जल्दी उठते थे बल्कि, सभी भाइयों को भी उठाकर खेत में ले जाते थे।
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- फोटो : फाइल फोटो
मनोहर लाल खट्टर 24 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़ गए थे। 1979 इलाहाबाद में हुए विश्व हिंदू परिषद के समागम में पहुंचे और कई संतों और संघ के प्रचारकों से मिले। 1980 में उन्होंने ताउम्र आरएसएस से जुड़ने और शादी न करने का फैसला लिया। उनके इस फैसले का घरवालों ने काफी विरोध किया, पर वे नहीं माने।
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हरियाणा विधानसभा, सीएम खट्टर
- फोटो : SELF
लगातार 14 साल गुजरात, हिमांचल, जम्मू कश्मीर जैसे 12 राज्यों में काम करने के बाद उन्हें 1995 में संघ की तरफ से एक्टिव राजनीति में आने का मौका मिला। 1994 में बीजेपी ने उन्हें हरियाणा का संगठन मंत्री बनाया। 1996 में बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी के साथ गठबंधन कर बीजेपी को सत्ता में हिस्सेदारी दिलाई। फिर जब देखा कि बंसीलाल सरकार की ठीक नहीं जा रही तो आलाकमान को सपोर्ट वापसी के लिए राजी किया।
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मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : अमर उजाला
बीजेपी ने इसके बाद ओमप्रकाश चौटाला को बाहर से सपोर्ट देने का फैसला किया। बाद में इनेलो के साथ इस अलाएंस ने 1999 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा की सभी 10 सीटें जीत ली। 2014 में विधानसभा चुनावों के दौरान करनाल सीट से उन्होंने पहली बार एमएलए का चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड तोड़ मैजारिटी से जीत दर्ज कर हरियाणा के सीएम बने।
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CM Khattar With PM Modi
- फोटो : File Photo
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बीच कई समानताएं हैं। नरेंद्र मोदी जब गुजरात के पहली बार मुख्यमंत्री बने तब उनके पास कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं था। मोदी की तरह खट्टर भी पहली बार ही विधायक बनने के बाद मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। मोदी की तरह खट्टर भी ऐसे नेता हैं, जिन पर पारिवारिक जिम्मेदारी नहीं है और दोनों ही आपस में दोस्त भी हैं।
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Mahohar Lal Khattar
- फोटो : अमर उजाला
मोदी ने आरएसएस में अपना जीवन प्रचारक के तौर पर शुरू किया। इसी तरह खट्टर भी लंबे समय तक आरएसएस प्रचारक रहे। खट्टर के पिता दुकानदार, जिसमें उन्होंने भी काम किया थे, जबकि मोदी के पिता की भी चाय की दुकान थी। मोदी की तरह खट्टर को भी आरएसएस में काम करने के बाद सरकार चलाने की अहम जिम्मेवारी दी गई।
मोदी को जब गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर भाजपा हाईकमान की ओर से नियुक्त किया गया तो कई स्थानीय वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी हुई थी इसी तरह से खट्टर को जब भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री के तौर पर नाम फाइनल किया गया तो भी हरियाणा के कई ऐसे नेता जो मुख्यमंत्री की दौड़ में थे, उनकी अनदेखी हुई।